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Sunday, 10 April 2022

राम वन गमन पर्यटन परिपथ

 09 अप्रैल 2022

 कोरिया से सुकमा तक हर कदम में होंगे प्रभु राम के दर्शन 


रायपुर
:  09 अप्रैल 2022: (छत्तीसगढ़ मेल ब्यूरो)::

छत्तीसगढ़ प्रभु राम के ननिहाल के रूप में सम्पूर्ण विश्व में अपनी अलग पहचान रखता है। वनवास काल में प्रभु राम ने यहाँ लम्बा वक्त बिताया। यहां के ऋषियों के आश्रम, प्रकृति के मध्य वनवास काटा, इसलिए यहाँ की जनश्रुतियों, लोककथाओं और आम जनजीवन में राम रचे-बसे हैं।

मुख्यमंत्री श्री भूपेश बघेल ने जनमान्यताओं का सम्मान करते हुए और भगवान प्रभु राम के ननिहाल प्राचीन दक्षिण कौशल और वर्तमान छत्तीसगढ़ में राम पथ वनगमन पर्यटन परिपथ की परियोजना तैयार की। इस परियोजना में राम वनगमन मार्ग से जुड़े धार्मिक और ऐतिहासिक महत्व के स्थलों को सजाने, संवारने और इन्हें पर्यटन की दृष्टि से सुविधा सम्पन्न बनाने का काम हाथ में लिया गया है। ऐसी मान्यता है कि प्रभु श्रीराम के साथ माता सीता और लक्ष्मण ने वनवास काल 14 वर्षों में 10 साल छत्तीसगढ़ में बिताये थे। जिन जगहों पर प्रभु राम आए थे ऐसे 75 स्थानों को चिन्हांकित कर धार्मिक पर्यटन के अनुरूप विकसित करने का लक्ष्य रखा गया है।

शिवनाथ, जोंक और महानदी के त्रिवेणी संगम में स्थित शिवरीनारायण के मंदिर परिसर एवं आस-पास के क्षेत्रों को विकसित करने एवं पर्यटकों की सुविधाओं के लिए 39 करोड़ रूपए की कार्य योजना तैयार की गई है। जिसके प्रथम चरण में 6 करोड़ रूपए के कार्य का लोकार्पण 10 अप्रैल को रामनवमी के दिन मुख्यमंत्री श्री भूपेश बघेल करने जा रहे हैं। इनमें शिवरीनारायण के मंदिर परिसर का उन्नयन एवं सौदर्यीकरण, दीप स्तंभ, रामायण इंटरप्रिटेशन सेन्टर एवं पर्यटक सूचना केन्द्र, मंदिर मार्ग पर भव्य प्रवेश द्वार, नदी घाट का विकास एवं सौंदर्यीकरण, घाट में प्रभु राम-लक्ष्मण और शबरी माता की प्रतिमा का निर्माण किया गया है। इसी प्रकार पचरी घाट में व्यू पाइंट कियोस्क, लैण्ड स्केपिंग कार्य, बाउंड्रीवाल, मॉड्यूलर शॉप, विशाल पार्किंग एरिया और सार्वजनिक शौचालय का निर्माण शामिल है।

राम वन गमन पर्यटन परिपथ के अंतर्गत कोरिया से सुकमा तक के धार्मिक स्थलों को जोड़ने के लिए 2260 किमी की लंबाई तक सड़क निर्माण भी प्रस्तावित है। इस मार्ग में छायादार और फलदार पौधों का रोपण वन विभाग द्वारा किया जा रहा है। इस परियोजना के तहत चिन्हांकित 75 स्थानों में से प्रथम चरण में चिन्हांकित 9 स्थलों को विकसित करने की परियोजना तैयार की गई है। इस पर्यटन परिपथ के पूर्ण होने से देश के विभिन्न हिस्सों से न केवल पर्यटक छत्तीसगढ़ आएगें, साथ ही छत्तीसगढ़ के विभिन्न हिस्सों से पर्यटकों का यहां आना-जाना लगा रहेगा। पर्यटन को बढ़ावा मिलने से स्थानीय लोगों को रोजगार मिलेगा। वहीं रोजगार के नए अवसरों में भी वृद्धि होगी।

राम वन गमन पर्यटन परिपथ के तहत प्रथम चरण में चिन्हांकित स्थलों में सीतामढ़ी-हरचौका (कोरिया), रामगढ़ (सरगुजा), शिवरीनारायण (जांजगीर-चांपा), तुरतुरिया (बलौदाबाजार), चंदखुरी (रायपुर), राजिम (गरियाबंद), सिहावा सप्तऋषि आश्रम (धमतरी), जगदलपुर (बस्तर) और रामाराम (सुकमा) 138 करोड़ रुपए की लागत से इन क्षेत्रों में पर्यटन के विकास का कार्य होगा। इन स्थानों में पर्यटन की दृष्टि से सौंदर्यीकरण एवं अन्य साज सज्जा के कार्य किए जाएंगे।

प्रभु राम के छत्तीसगढ़ में प्रवेश कोरिया जिले के सीतामढ़ी-हरचौका से हुआ था। यहां विभिन्न पर्यटक सुविधा के विकास के लिए तीन करोड़ 84 लाख दो हजार रूपए स्वीकृत किए हैं। कोरिया जिले के सीतामढ़ी के पास घाट पर कियोस्क निर्माण कार्य के लिए 66 लाख 21 हजार रूपए, सीतामढ़ी के पास बैठने की जगह और घाट के आस-पास पैदल मार्ग के साथ गजीबो निर्माण कार्य के एक करोड़ 42 लाख सात हजार रूपए एवं घाट विकास कार्य हेतु एक करोड़ 75 लाख 74 हजार रूपए स्वीकृत किए गए हैं।

सुकमा जिले के रामाराम छत्तीसगढ़ में प्रभुराम के वनवास काल का अंतिम पड़ाव है। यहां पर्यटकों के रुकने की व्यवस्था एवं परिपथ निर्माण प्रस्तावित है। सिहावा में यात्रियों के ठहरने के लिए समरसता भवन, ऋषि आश्रम जीर्णाेद्धार का कार्य होगा। पेयजल सुविधा, गार्डन निर्माण, तालाब सौंदर्यीकरण, शौचालय, विश्रामगृह, नील नदी में स्टॉप डेम, अंडरग्राउंड नाली निर्माण का कार्य होगा। तुरतुरिया में कॉटेज बनाए जाएंगे, महानदी पर वाटरफ्रंट डेवलपमेंट और कॉटेज विकसित होंगे, बस्तर व दंतेवाड़ा के गीदम में जटायु द्वार, बारसूर में ट्राइबल कॉटेज बनाए जाने की योजना है।

Saturday, 28 August 2021

बिलासपुर : कोरोना काल संकट में मनरेगा बना सहारा

  मनरेगा रोजगार देने में छत्तीसगढ़ देश में प्रथम स्थान पर है 


बिलासपुर
: 28 अगस्त 2021: (छत्तीसगढ़ मेल ब्यूरो)::

कोरोना महामारी के दौरान देश के अधिकांश हिस्सों में लॉकडाउन हो गया, चाहे कोरोना संक्रमण का प्रथम चरण हो या दूसरा चरण दोनों ही समय में देश भर में लॉकडाउन होने से व्यावसायिक और आर्थिक गतिविधियों पर व्यापक प्रभाव देखा गया बहुत सी औद्योेगिक ईकाईयां बंद हो गयी अथवा इनमें उत्पादन प्रभावित हुआ। देश के बड़े-बड़े शहरों से छोटे-छोटे व्यवसाय या मजदूरी करने वाले श्रमिक अपने-अपने गांवों की ओर लौटने लगे इससे छत्तीसगढ़ राज्य के प्रवासी श्रमिक भी बहुत अधिक मात्रा में प्रभावित हुए। 

मुख्यमंत्री श्री भूपेश बघेल के निर्देश पर देश के अन्य राज्यों से छत्तीसगढ़ के फंसे श्रमिकों को विशेष ट्रेनों और बसों के माध्यम से लाया गया उन्हें मनरेगा के माध्यम से रोजगार उपलब्ध कराया गया। कोरोना संकट काल की सबसे बड़ी चुनौती थी कि किस प्रकार सुरक्षात्मक उपायों का पालन करते हुए समूह में रोजगार उपलब्ध कराने वाले कार्य जारी रखे जाये. पूरे प्रदेश भर के गांव-गांव में कोरोना से बचाव की गाइडलाइन का पालन किया गया। मनरेगा को आजीविका के साथ ही परिसंपत्तियों और सार्वजनिक सुविधाओं का माध्यम बनाया गया। मनरेगा के कार्याें में छत्तीसगढ़ उत्कृष्ट प्रदर्शन जारी है. वित्तीय वर्ष 2020-21 में मनरेगा जॉब कार्डधारी परिवारों को 100 दिनों का रोजगार देने में छत्तीसगढ़ देश में प्रथम स्थान पर है। 

मुख्यमंत्री श्री भूपेश बघेल ने मनरेगा में लगातार अच्छे प्रदर्शन के लिए संबंधित विभागों के शासकीय अधिकारियों, कर्मचारियों तथा पंचायत प्रतिनिधियों को बधाई दी है. उन्होंने कहा कि कोविड 19 के चलते लॉकडाउन के बावजूद मनरेगा के अंतर्गत तत्परता से शुरू हुए कार्याें से ग्रामीणों और प्रवासी मजदूरों को अपने गांव घरों मंे बड़ी संख्या के सीधे रोजगार मिला. मनरेगा के अंतर्गत विषम परिस्थितियों के बावजूद ग्रामीण अर्थव्यवस्था को गति प्रदान करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है.

मनरेगा के अंतर्गत सामुदायिक एवं व्यक्तिमूलक संवर्धन के कार्याें के तहत् जल संरक्षण के साथ कृषि, उद्यानिकी और पशुपालन से जुड़ी अधोसंरचना को मजबूत करने के लिए विविधि परिसंपत्तियों का निर्माण किया जा रहा है। प्रदेश के सभी विकासखण्डों में निजी डबरी, कुंआ, भूमि सुधार, तालाब निर्माण, गौठान निर्माण, पशु शेड निर्माण, चारागाह निर्माण, शासकीय भूमि पर वृक्षारोपण, व्यक्तिमूलक फलदार वृक्षारोपण, आंगनबाड़ी भवन निर्माण, हितग्राहियों के लिए बकरी शेड, मुर्गी शेड, महिला समूह के माध्यम से नर्सरी में पौध निर्माण, सिंचाई के लिए नाली निर्माण, बोल्डर डेम, चेक डेम, गोवियन निर्माण तथा महिला समूह के लिए वर्क शेड निर्माण जैसे महत्वपूर्ण कार्य कराये जा रहे है।

मनरेगा कार्यस्थलों पर कोरोना से बचाव और आवश्यक सावधानियों के बारे में भी श्रमिकों को नियमित रूप से जागरूक किया जा रहा है। देशव्यापी लॉकडाउन के दौरान प्रदेश् भर के ग्रामीणों को स्थानीय स्तर पर रोजगार उपलब्ध कराने और ग्रामीण अर्थव्यवस्था की मजबूती के लिए मनरेगा के अंतर्गत प्रदेश भर में व्यापक स्तर पर काम शुरू किये गये है. इन कार्याें से प्रतिदिन 22 लाख से 25 लाख जॉब कार्ड धारियों को रोजगार उपलब्ध हो रहा है।  

Thursday, 26 March 2020

नक्सली घटना में शहीद जवानों को सदन में दी गई विनम्र श्रद्धांजलि

जवानों ने बहादुरी के साथ नक्सलियों से मोर्चा लिया
रायपुर: 26 मार्च 2020: (छत्तीसगढ़ मेल ब्यूरो)::
छत्तीसगढ़ विधानसभा में आज सुकमा जिले के चिंतागुफा थाने के मिनपा एवं कसलपाड़ क्षेत्र में नक्सली हमले में शहीद जवानों को विनम्र श्रद्धांजलि दी गई। विधानसभा अध्यक्ष डाॅ. चरणदास महंत ने विधानसभा की कार्यवाही शुरू होते ही इस नक्सली घटना की सदन को जानकारी दी। उन्होंने शहीद जवानों को श्रद्धांजलि देते हुए कहा कि इस नक्सली घटना की जितनी निंदा की जाए कम है। उन्होंने कहा कि जवानों ने बहादुरी के साथ नक्सलियों से मोर्चा लिया। उनका बलिदान व्यर्थ नहीं जाएगा। मुख्यमंत्री श्री भूपेश बघेल ने इस घटना को दुर्भाग्यजनक बताते हुए कहा कि हमारे जवान नक्सलियों के साथ बहादुरी के साथ लड़े। उन्होंने अनेक नक्सलियों को भी मारा। मैं उनकी बहादुरी को नमन करता हूं। श्री बघेल ने शहीदों को परिवारजनों के प्रति संवेदना प्रकट की। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार विकास, विश्वास और सुरक्षा के साथ इस चुनौती का सामना कर रही है। जवानों की शहादत व्यर्थ नहीं जाएगी। श्री बघेल ने इस घटना में घायल जवानों के शीघ्र स्वास्थ्य लाभ की कामना की। मुख्यमंत्री ने कहा कोरोना महामारी से बचाव के लिए सोशल डिसटेंसिंग में ही सबकी सुरक्षा है। इस बीमारी से बचाव के लिए राज्य सरकार हर संभव उपाय कर रही है। नेता प्रतिपक्ष श्री धरमलाल कौशिक, उद्योग मंत्री श्री कवासी लखमा और विधायक श्री मोहन मरकाम ने भी अपने विचार व्यक्त किए। सदन में मौन रख कर विनम्र श्रद्धांजलि दी गई।

Friday, 13 March 2020

रायपुर:मशरूम से वनांचल की महिलाएं बनी आत्मनिर्भर

आमदनी के साथ साथ मिल रहा खनिजों से भरपूर पोषण आहार भी 
रायपुर: 13 मार्च 2020: (छत्तीसगढ़ मेल):: 
दुनिया लाख नश्वर सही लेकिन पैसे के बिना कहां चलती है? बहुत ही सादगी से दाल रोटी भी कहानी हो तो भी पैसा चाहिए। पैसे बिना तो प्यार व्यार भी फ़िज़ूल कहा गया है। पुरानी कहावत है-बाप भइआ,  सब से बड़ा रुपइया। इन सभी हकीकतों के बावजूद सबसे यही होता है कि पैसा आये कहाँ से? हमारे समाज में सबसे अधिक दमन का शिकार हैं महिलाये क्यूंकि सबसे अधिक मेहनत करके भी उनके पल्ले पैसा नहीं पड़ता। ऐसे में कुछ मेहनती महिलाओं ने अपने समूह बनाये और अपनी मेहनत से पैसा कमा कर दिखाया। हम यहां आपको कहानी बता रहे है उन महिलाएं की जिन्होंने मशरूम के ज़रिये अपने पैरों पर खड़ा हो कर दिखाया। 
मशरूम स्वाद का खजाना होने के साथ ही पौष्टिकता से भरपूर होता है। कम लागत में इससे अधिक आमदनी ली जा सकती है। इसे देखते हुए दूरस्थ वनांचल क्षेत्रों में प्रशासन द्वारा मशरूम उत्पादन को बढ़ावा दिया जा रहा है। इससे लोगों को स्थानीय स्तर पर पौष्टिक आहार के साथ आर्थिक आत्मनिर्भरता मिल रही है। इस दिशा में अपने कदम बढ़ाते हुए सुकमा जिले के कांजीपानी और चिपुरपाल की महिला स्व-सहायता समूहों ने स्वादिष्ट मशरूम का उत्पादन कर अपनी एक अलग पहचान कायम की है। इससे महिला समूह न केवल आर्थिक लाभ हो रहा है बल्कि लोगों को प्रोटीन, विटामिन, आवश्यक लवण और विभिन्न प्रकार के खनिजों से भरपूर पोषण आहार भी मिल रहा है। इन समूहों द्वारा 2 से 3 किलो मशरूम प्रतिदिन बेचकर अतिरिक्त आय प्राप्त की जा रही है।
   मशरूम में आवश्यक सभी पोषक तत्व होने के कारण यह कुपोषण दूर करने का चमत्कारी गुण रखता हैं साथ ही इसमें कई औषधीय गुण भी पाए जाते हैं। इन लाभों को देखते हुए कृषि विभाग द्वारा एग्रीकल्चर एक्सटेंशन रिफार्म (आत्मा) योजना के अन्तर्गत महिला समूहों को प्रशिक्षित कर मशरूम उत्पादन के लिए प्रेरित किया जा रहा है। यहां प्रशिक्षण लेकर छिन्दगढ़ विकासखण्ड के कांजीपानी गांव के कमलफूल कृषक समूह एवं चिपुरपाल गांव के ऋतम्भरा महिला कृषक समूह के द्वारा मशरूम उत्पादन किया जा रहा है। 
इस सफलता के संबंध में 10 सदस्यों वाली कमलफूल समूह की अध्यक्ष श्रीमती सुशीला बघेल व सचिव श्री फुलमती मांझी है। जबकि 11 सदस्यों वाली ऋतम्भरा महिला कृषक समूह कीे अध्यक्ष श्रीमती सुक्को बघेल व सचिव श्रीमती प्रमिला नाग है। कृषि महाविद्यालय जगदलपुर व रायपुर से मशरूम उत्पादन के ढांचे की भली-भांति जानकारी होने के बाद इन समहों ने मशरूम उत्पादन प्रारम्भ किया। 
जिला प्रशासन ने भी इन समूहों की मदद करते हुए पैरा काटने के लिए कटर मशीन उपलब्ध कराया। मशरूम उत्पादन से अपनी मेहनत को साकार रूप लेते देख ग्रामीण महिलाएं खुश हैं। महिला समूह ने बताया कि मशरूम का उपयोग सब्जी के रूप में करने के अतिरिक्त इससे बड़ी, पापड़, आचार और मशरूम पाउडर के रूप में उपयोग किया जा सकता है। इसके उपयोग से विभिन्न प्रकार के व्यंजन भी तैयार किये जा सकते हैं जो स्वादिष्ट, पौष्टिक होने के साथ कुपोषण दूर करने में सहायक होते हैं।

Sunday, 21 July 2019

मुख्यमंत्री से केंद्रीय राज्य मंत्री रेणुका सिंह की सौजन्य मुलाकात

भेंट के दौरान जनजातीय मामलों पर भी विचार हुआ
रायपुर: 21 जुलाई 2019: (छत्तीसगढ़ मेल)::
छत्तीसगढ़ में जनजातीय मामलों को आम तौर पर विशेष ध्यान दिया जाता है। इस मकसद के लिए केंद्रीय मंत्री और अन्य महत्वपूर्ण व्यक्ति भी विभिन्न स्थानों के दौरे करते रहते हैं। आज यहां इस सिलसिले में केन्द्रीय जनजातीय मामलों की राज्य मंत्री श्रीमती रेणुका सिंह ने भी विशेष दौरा किया। इस दौरे के दौरान उन्होंने मुख्यमंत्री से सौजन्य मुलाकात भी की। इस भेंट के दौरान जनजातीय मामलों पर भी विचार हुआ।