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Monday, 5 February 2024

कोरबा: अब जरूरत के समय किसी से पैसा मांगने की नहीं आएगी नौबत

 महतारी वंदन योजना से महिलाओं में उत्साह का माहौल 


कोरबा: 05 फरवरी 2024: (के के सिंह//मीडिया लिंक//छतीसगढ़ मेल डेस्क)::

सदियों पहले भी कहा जाता था--मांगन गया सो मर गया--मांगन मूल न जा! सचमुच मांगना मौत के सामान ही तो होता है। इसके बावजूद पारिवारिक संकट और ज़िम्मेदारियां किसी न किसी के सामने हाथ पसारने के लिए मजबूर कर देती हैं। इन मजबूर हाथों को आज़ाद किया है मोदी सरकार ने। मोदी  नीतियां छत्तीसगढ़  गांवों तक भी  शहरों  तक भी। पूरी कहानी बहुत दिलचस्प है। 

आओ चलते हैं पूरी बात जानने छत्तीसगढ़ के खूबसूरत ज़िले कोरबा में। कोरबा जिला को 25 मई सन 1998 में प्रभावी पूर्ण राजस्व जिले का दर्जा प्राप्त हुआ| जिसका मुख्यालय कोरबा शहर में है, जो कि हसदेव और अहिरन नदी के संगम के किनारे स्थित है। कोरबा छत्तीसगढ़ की ऊर्जाधानी भी है । कोरबा जिला बिलासपुर संभाग के अंतर्गत आता है। कोरबा जिला मुख्यालय राजधानी रायपुर से लगभग 200 किलोमीटर दुरी पर स्थित है। यहां की महिलाएं भी काफी सक्रिय हैं। 

महिलाओं की सक्रियता के कारण समाजिक उत्थान भी हो रहा है। महिलाओं की सक्रियता  हुए सरकार ने भी महिलाओं को  पांवों पर खड़ा करने के लिए कई  तरह की योजनाएं बनाई हैं। इनका फायदा भी महिला वर्ग तक पहुंच  रहा है। 

छत्तीसगढ़ राज्य में कोरबा जिला उत्तर की ओर स्थित है जो, कोरिया,सरगुजा,बिलासपुर,जांजगीर,रायगढ़ जिलों से घिरा हुआ है। कोरबा जिला मुख्यालय राजधानी रायपुर से लगभग 200 किलोमीटर दुरी पर स्तिथ है। कोरबा जिले का कुल क्षेत्रफल 7,14,544 हेक्टेयर है जिसमें से 2,83,497 हेक्टेयर वन भूमि है,जो की कुल क्षेत्रफल का लगभग 40 प्रतिशत है। 

मोदी की गारंटी के तहत छत्तीसगढ़ सरकार द्वारा आज से महतारी वंदन योजना से आवेदन की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है। प्रतिमाह एक हजार रुपए और साल में 12 हजार महिलाओं के खाते में अंतरित करने के साथ उन्हें आर्थिक मदद पहुंचाने की इस पहल से महिलाओं में एक अलग ही उत्साह का वातावरण है। उनका कहना है कि सरकार की इस योजना से हमें अब अपनी छोटी-छोटी जरूरतों में किसी के पास पैसा मांगने की आवश्यकता नहीं होगी। मीडिया ने  में महिला वर्ग से भी बात की। 

कोरबा जिले के कोरबा विकासखंड अंतर्गत ग्राम दोन्दरो की श्रीमती सुषमा देवांगन ने बताया कि हमने सोचा भी नहीं था कि महिलाओं के लिए ऐसी योजनाएं शुरू की जाएगी जिसमें हर माह एक हजार रुपए  राशि दी जाएगी। उन्होंने कहा कि हम घर चलातीं हैं और अक्सर अपनी बचत के पैसे को भी घर के जरूरी सामानों के लिए खर्च कर देतीं हैं। होता यह है कि हमारी पारिवारिक जेब भी खाली हो जाती है और व्यक्तिगत। इसलिए सरकारी सहायता हमारे लिए बहुत अच्छी खबर की तरह आई है। सरकार से एक हजार रुपए मिलने से हम अपने आवश्यकताओं के लिए पैसे का इंतजाम कर पाएंगी।

इसी संबंध में ग्राम पताढ़ी की कविता यादव ने बताया कि महतारी वंदन योजना बहुत अच्छी योजना है। वह भी इसका आवेदन करेंगी। उन्होंने बताया कि मेरी जैसी अनेक महिलाओं को इस योजना से लाभ मिलेगा। यह योजना हमें आर्थिक रुप से मज़बूत बनाएगी। हम अपनी छोटी-छोटी आवश्यकताओं को पूरा कर पाएंगी। 

इस योजना को लेकर ग्राम बेन्दरकोना की श्रीमती सुलोचना बाई ने बताया कि हम इस योजना के प्रारंभ होने का इंतजार कर रहे थे। अब यह योजना शुरू हो गई है। आज से फॉर्म भराया जा रहा है। जल्द ही यह प्रक्रिया भी पूरी  हो जाएगी।

उन्होंने बताया कि हम महिलाओं के लिए एक-एक रुपये का महत्व होता है। कई बार एक-एक रुपये बचा कर कुछ पैसे बचत करतीं हैं। सरकार द्वारा एक माह में एक हजार रुपये और साल में 12 हजार रूपए दिए जाने से महिलाओं को सक्षम बनने के साथ बहुत राहत मिलेगी। 

इसे एक शानदार पहल बताते हुए ग्राम गोढ़ी की ललिता बाई भी बहुत खुश थी। वह भी महतारी वंदन योजनांतर्गत आवेदन करने शिविर में आई हुई थीं। उन्होंने बताया कि छत्तीसगढ़ सरकार द्वारा आज से आवेदन लेने की जानकारी मिली है, इसलिए वह भी ऑनलाइन आवेदन करने अपना जरूरी दस्तावेज इकट्ठा कर रहीं हैं। उन्होंने भी इस योजना से महिलाओं को लाभ मिलने और सशक्तिकरण होने की बात कही।

अब बात करते हैं नियमों और विधिविधान की। इस मकसद के लिए पात्रता की शर्तें इस प्रकार हैं:

महतारी वंदन योजना के लिए निर्धारित पात्रता शर्ताे में महिला को छत्तीसगढ़ का निवासी होना जरूरी है। इसके अलावा जिस वर्ष आवेदन किया जा रहा है उस वर्ष विवाहित महिला की आयु 01 जनवरी 2024 में 21 वर्ष से कम नही होनी चाहिए। योजना के अंतर्गत विधवा, तलाकशुदा, परित्यक्त महिला भी पात्र होंगी। 

महतारी वंदन योजना के अंतर्गत प्रत्येक पात्र महिला को 1000 रूपए की प्रतिमाह के मान से साल में 12 हजार रूपए की राशि डी.बी.टी के माध्यम से उनके बैंक खातों में हस्तांतरण किया जाएगा। विभिन्न पेंशन योजनाओं के तहत लाभान्वित होने वाली ऐसी महिलाएं जिन्हे प्रतिमाह 1000 रूपए से कम राशि मिल रही है, उन्हें योजना के लिए पात्र होने पर अतिरिक्त राशि स्वीकृत की जाएगी, जिससे उन्हें अधिकतम 1000 रूपए मासिक राशि प्राप्त हो सकेगी।

अब आनलाइन आवेदन हेतु पोर्टल एवं एप्प की भी बात कर लें:

महतारी वंदन योजना के लिए आवेदन निःशुल्क होगा। इस योजना के लिए ऑनलाइन भरने के लिए पोर्टल  https://www.mahtarivandan.cgstate.gov.in पर आवेदन करना होगा। इसके अलावा योजना के लिए बनाए गए मोबाईल एप्प पर भी आवेदन जमा किया जा सकता है। योजना के लिए आवेदन 05 फरवरी से लिए जाएंगे। आवेदन भरने की अंतिम तिथि 20 फरवरी 2024 होगी।

ये दस्तावेज़ जमा करना होगा-

आवेदन करते समय हितग्राहियों को स्वयं का सत्यापित किया हुआ पासपोर्ट साइज की फोटो, स्थानीय निवास प्रमाण पत्र, राशन कार्ड, मतदाता परिचय पत्र में से कोई भी एक, स्वयं एवं पति का आधार कार्ड, स्वयं एवं पति का पैन कार्ड (यदि हो तो), विवाह का प्रमाण पत्र, ग्राम पंचायत व स्थानीय निकायों द्वारा जारी प्रमाण पत्र, विधवा होने की स्थिति में पति का मृत्यु प्रमाण पत्र, परित्यक्ता होने की स्थिति में समाज द्वारा जारी वार्ड अथवा ग्राम पंचायत द्वारा जारी प्रमाण पत्र, जन्म प्रमाण पत्र हेतु 10 अथवा 12 की अंकसूची, स्थानांतरण प्रमाण पत्र, पैन कार्ड, परिचय पत्र, ड्राइविंग लाइसेंस में से कोई एक, बैंक खाते का विवरण एवं बैंक पासबुक की छायाप्रति तथा स्व-घोषणा अथवा शपथ पत्र जमा कराना होगा।  इस तरह यह सारी प्रक्रिया पूरी होते ही सबंधित महिला इस लाभ की पात्र बन जाएगी। 

आपको सरकार की यह पहल कैसी लगी अवश्य बताएं। आपके विचारों की इंतज़ार रहेगी ही। महिला उत्थान अर्थात पूरे समाज का उत्थान।  

Friday, 27 August 2021

कोरबा: बैंक सखी के माध्यम से घर पहुंच हो रहा पेंशन, मजदूरी का भुगतान

 श्रीमती भगवती ने किया तीन करोड़ रूपए से अधिक का लेनदेन 

बैंक सखी की फाईल फोटो 
कोरबा: 27 अगस्त 2021: (छत्तीसगढ़ मेल ब्यूरो)::

बैंक सखी की फाईल फोटो
विकासखण्ड पाली के गांव बड़ेबांका, नानबांका, मदनपुर, चैतमा एवं कुटेलामुड़ा के ग्रामीणों को पेंशन, मजदूरी के भुगतान के लिए बैंक का चक्कर नहीं लगाना पड़ता है। बैंक सखी श्रीमती भगवती धु्रव के कारण अब ग्रामीणों को बैंकिंग सेवाएं घर-पहुंच मिल रही है। इन पांच गांवों के लोगों को मनरेगा भुगतान, पेंशन भुगतान, प्रधानमंत्री आवास योजना की राशि आसानी से गांव में मिल जा रहा है। गांव के दिव्यांग और वृद्धजनों को पेंशन लेने के लिए बैंक जाने से राहत मिल गई है। बैंक सखी भगवती पांच गांवो के 255 खातों का संचालन कर हितग्राहियों को घर पहुंच राशि का भुगतान कर रही हैं। भगवती दो साल से भी कम समय में तीन करोड़ 11 लाख 49 हजार 807 रूपए का लेनदेन कर चुकी है। राशि लेनदेन के लिए बैंक सखी भगवती को कमीशन भी प्राप्त हुआ है। श्रीमती भगवती अब तक 50 हजार रूपए बैंक कमीशन के माध्यम से प्राप्त कर चुकी हैं। गांव में घर पहुंच बैंकिग सेवाओं के मिल जाने से जहां एक ओर ग्रामीण खुश हैं, वहीं दूसरी ओर बैंक कमीशन के माध्यम से होने वाली आवक ने भगवती को आत्मनिर्भर बना दिया है। भगवती अपने घरेलू और सामाजिक जिम्मेदारियों को पूरा करने के साथ अपने बैंकिंग के कार्यों को समय पर पूरा करते हुए गांव के लोगों को राहत पहुंचा रहीं हैं। बैंक सखी भगवती ग्रामीणों को वृद्धावस्था पेंशन, निराश्रित पेंशन, गोधन न्याय योजना का पैसा एवं मनरेगा मजदूरी जैसे भुगतान हितग्राहियों को उनके खातों के माध्यम से आधार आधारित पेमेंट कर रही है। भगवती यह प्रक्रिया बायो मेट्रिक डिवाइस की सहायता से संचालित कर रही है।

विकासखण्ड पाली के ग्राम पंचायत मदनपुर की रहने वाली भगवती धु्रव बीए सेकेण्ड ईयर की पढ़ाई की है। बैंक सखी बनने से पहले भगवती गृहणी थी। दो बच्चों की मां भगवती बैंकिंग कार्यों के लिए फील्ड में अपने पति के साथ  जाती हैं। भगवती का पति गांव के बाजारों में दुकान लगाते हैं। भगवती ने बताया कि गांव में रोजगार मूलक गतिविधियों में जुड़ने और आर्थिक लाभ कमाने के उद्देश्य से लक्ष्य स्वसहायता समूह में जुड़ी। समूह में जुड़कर बैंक सखी का काम शुरू किया। भगवती के बैंक सखी बन जाने से ग्रामीणों को आसानी से बैंकिंग सुविधा का लाभ मिल रहा है। ग्रामीणों को खाता खुलवाने के लिए कहीं दूर जाना नहीं पड़ता है। भगवती के माध्यम से गांव में ही खाता खुल जाता है। गांव में बैंकिंग सेवा उपलब्ध होने से लोगों के समय और धन की बचत भी हो रही है। बैंक सखी के माध्यम से सरकार के विभिन्न शासकीय योजनाओं के सफल संचालन में सहयोग मिल रहा है।

Friday, 13 March 2020

रायपुर:मशरूम से वनांचल की महिलाएं बनी आत्मनिर्भर

आमदनी के साथ साथ मिल रहा खनिजों से भरपूर पोषण आहार भी 
रायपुर: 13 मार्च 2020: (छत्तीसगढ़ मेल):: 
दुनिया लाख नश्वर सही लेकिन पैसे के बिना कहां चलती है? बहुत ही सादगी से दाल रोटी भी कहानी हो तो भी पैसा चाहिए। पैसे बिना तो प्यार व्यार भी फ़िज़ूल कहा गया है। पुरानी कहावत है-बाप भइआ,  सब से बड़ा रुपइया। इन सभी हकीकतों के बावजूद सबसे यही होता है कि पैसा आये कहाँ से? हमारे समाज में सबसे अधिक दमन का शिकार हैं महिलाये क्यूंकि सबसे अधिक मेहनत करके भी उनके पल्ले पैसा नहीं पड़ता। ऐसे में कुछ मेहनती महिलाओं ने अपने समूह बनाये और अपनी मेहनत से पैसा कमा कर दिखाया। हम यहां आपको कहानी बता रहे है उन महिलाएं की जिन्होंने मशरूम के ज़रिये अपने पैरों पर खड़ा हो कर दिखाया। 
मशरूम स्वाद का खजाना होने के साथ ही पौष्टिकता से भरपूर होता है। कम लागत में इससे अधिक आमदनी ली जा सकती है। इसे देखते हुए दूरस्थ वनांचल क्षेत्रों में प्रशासन द्वारा मशरूम उत्पादन को बढ़ावा दिया जा रहा है। इससे लोगों को स्थानीय स्तर पर पौष्टिक आहार के साथ आर्थिक आत्मनिर्भरता मिल रही है। इस दिशा में अपने कदम बढ़ाते हुए सुकमा जिले के कांजीपानी और चिपुरपाल की महिला स्व-सहायता समूहों ने स्वादिष्ट मशरूम का उत्पादन कर अपनी एक अलग पहचान कायम की है। इससे महिला समूह न केवल आर्थिक लाभ हो रहा है बल्कि लोगों को प्रोटीन, विटामिन, आवश्यक लवण और विभिन्न प्रकार के खनिजों से भरपूर पोषण आहार भी मिल रहा है। इन समूहों द्वारा 2 से 3 किलो मशरूम प्रतिदिन बेचकर अतिरिक्त आय प्राप्त की जा रही है।
   मशरूम में आवश्यक सभी पोषक तत्व होने के कारण यह कुपोषण दूर करने का चमत्कारी गुण रखता हैं साथ ही इसमें कई औषधीय गुण भी पाए जाते हैं। इन लाभों को देखते हुए कृषि विभाग द्वारा एग्रीकल्चर एक्सटेंशन रिफार्म (आत्मा) योजना के अन्तर्गत महिला समूहों को प्रशिक्षित कर मशरूम उत्पादन के लिए प्रेरित किया जा रहा है। यहां प्रशिक्षण लेकर छिन्दगढ़ विकासखण्ड के कांजीपानी गांव के कमलफूल कृषक समूह एवं चिपुरपाल गांव के ऋतम्भरा महिला कृषक समूह के द्वारा मशरूम उत्पादन किया जा रहा है। 
इस सफलता के संबंध में 10 सदस्यों वाली कमलफूल समूह की अध्यक्ष श्रीमती सुशीला बघेल व सचिव श्री फुलमती मांझी है। जबकि 11 सदस्यों वाली ऋतम्भरा महिला कृषक समूह कीे अध्यक्ष श्रीमती सुक्को बघेल व सचिव श्रीमती प्रमिला नाग है। कृषि महाविद्यालय जगदलपुर व रायपुर से मशरूम उत्पादन के ढांचे की भली-भांति जानकारी होने के बाद इन समहों ने मशरूम उत्पादन प्रारम्भ किया। 
जिला प्रशासन ने भी इन समूहों की मदद करते हुए पैरा काटने के लिए कटर मशीन उपलब्ध कराया। मशरूम उत्पादन से अपनी मेहनत को साकार रूप लेते देख ग्रामीण महिलाएं खुश हैं। महिला समूह ने बताया कि मशरूम का उपयोग सब्जी के रूप में करने के अतिरिक्त इससे बड़ी, पापड़, आचार और मशरूम पाउडर के रूप में उपयोग किया जा सकता है। इसके उपयोग से विभिन्न प्रकार के व्यंजन भी तैयार किये जा सकते हैं जो स्वादिष्ट, पौष्टिक होने के साथ कुपोषण दूर करने में सहायक होते हैं।