Wednesday, 6 November 2024

‘छत्तीसगढ़ या सबसे बढ़िया’

उप राष्ट्रपति सचिवालय//Posted On: 06 NOV 2024 at 8:55 PM by PIB Delhi//Azadi ka Amrit Mahotsav//Chhattisgarh

छत्तीसगढ़ राज्य महोत्सव के समापन समारोह में उपराष्ट्रपति के संबोधन का पाठ


सभी को नमस्कार,

सभी समानित पुरस्कार विजेताओं को बधाई, छत्तीसगढ़ में छत्तीससमान, अद्भुत, जिनको देखा ऊर्जा मिली है मुझे। सबसे पहले मैं आप सभी को छत्तीसगढ़ के स्थापना दिवस और राज्य उत्सव की बहुत-बहुत बधाई देता हूँ।

जब शताब्दी ने पलटी खाई छत्तीसगढ़ का उदय हुआ था और यह यात्रा यहां तक आ गई है, बहुत-बहुत शुभकामनाएं। कहते हैं, ‘छत्तीसगढ़ या सबसे बढ़िया’ - यह पुरानी कहावत है जो आज भी कानों में गूंजती है। यह छत्तीसगढ़ का प्रतिबिम्ब है और आज यहां आप सब इस कहावत को चरितार्थ कर रहे हैं, साबित कर रहे हैं।

इस समापन समारोह में आकर मेरा मन गौरव से भर गया है। यह महोत्सव मातृभूमि की गरिमा का प्रतीक बन गया है, छत्तीसगढ़ की पावन धरती पर यह हो रहा है, यहां की समृद्ध संस्कृतिक विरासत का जीवन्त दस्तावेज़ है। आज के पावन दिवस पर हमारा संकल्प होना चाहिए कि राष्ट्रहित सर्वोपरि है, राष्ट्रवाद के प्रति हम सदैव समर्पित रहेंगे, हर पल हमें बोध होना चाहिए कि हम सभी भारतीय हैं, भारतीयता हमारी पहचान है, हमें इस पर गौरव है, इसपर आंच नहीं आने देंगे।

सन 2000 में इस राज्य को एक विशिष्ट पहचान मिली, इस अवसर पर जैसा पहले कहा गया है, पूर्व प्रधानमंत्री भारत रतन श्रद्धेय श्री अटल बिहारी वाजपेयी जी को याद नहीं करेंगे तो बड़ी चूक हो जाएगी, अटल जी की याद तो सदा आती है, देश हित और राष्ट्र हित पर अटल जी सदैव अटल रहते थे और मानवीय भावनाओं पर बेहद मुलायम, मुझे याद है 1990 का वो कालखंड, केन्द्रीय मंत्री के रूप में मैं यूरोप गया था, एक संसदीय दल का नेतृत्व कर रहा था, मेरा परम सौभाग्य था कि उस दल में सम्मानीय अटल बिहारी वाजपेयी थे, कितना ज्ञान मुझे उस समय मिला, उन्होंने तीन नए राजे छत्तीसगढ़, उत्तराखंड एवं झारखंड इस देश को भेंट दिए।

राजनीति में कैसी सरजरी की, किसी को दर्द नहीं हुआ, किसी को पीड़ा नहीं हुई, सहज तरीके से ये संभव हो गया, आज मैं उनको नमन करता हूँ। आपने एक बहुत बड़ी मिसाल कायम की है, माननीय मुख्य मंत्री जी, आपने पड़ोसी राज्य के मुख्य मंत्री को बुलाकर एक बड़ा मापदंड हासिल किया है। मध्यप्रदेश के मुख्य मंत्री, यहां मुख्य अतिति के रूप में जब उद्धाटन करते हैं तो हमें याद आता है कि अटलजी ने जो कारीगरी की, उसमें कहीं दर्द नहीं था, भाईपन था, भाईचारा था।

अगले साल, क्योंकि शताब्दी के शुरुवात में आपका उदय हुआ था, अगले साल, छत्तीसगढ़ अपने स्वर्ण युग में प्रवेश करेगा, इसका सुखद समन्वय भारत के अमृत काल के साथ हो रहा है। काल के चक्र के साथ जब हम आगे बढ़ते हैं, तब हमें हमारे गौरवपूर्ण और गरिमाई विरासत को नहीं भूलना चाहिए, ये मौका है, ये अवसर है, हमारे जननायकों एवं महापुरुषों को याद करना, उनका चिरंतन करना, उनका सुमिरन करना।

आज जब हम अमृत काल मना रहे हैं, मुझे इस बात का गर्व है, आपको भी है, जिन लोगों ने आजादी में योगदान दिया, उनको दूर-दूर जाकर हम नमन कर रहे हैं, उनको पहचान रहे हैं, उन्होंने जो देश के लिए किया, हम सब नतमस्तक हो रहे हैं और बदलाव देखिए, कितना सार्थक है, कितना गहरा है। 

******//JK/RC/SM//(Release ID: 2071350) 

Monday, 5 February 2024

कोरबा: अब जरूरत के समय किसी से पैसा मांगने की नहीं आएगी नौबत

 महतारी वंदन योजना से महिलाओं में उत्साह का माहौल 


कोरबा: 05 फरवरी 2024: (के के सिंह//मीडिया लिंक//छतीसगढ़ मेल डेस्क)::

सदियों पहले भी कहा जाता था--मांगन गया सो मर गया--मांगन मूल न जा! सचमुच मांगना मौत के सामान ही तो होता है। इसके बावजूद पारिवारिक संकट और ज़िम्मेदारियां किसी न किसी के सामने हाथ पसारने के लिए मजबूर कर देती हैं। इन मजबूर हाथों को आज़ाद किया है मोदी सरकार ने। मोदी  नीतियां छत्तीसगढ़  गांवों तक भी  शहरों  तक भी। पूरी कहानी बहुत दिलचस्प है। 

आओ चलते हैं पूरी बात जानने छत्तीसगढ़ के खूबसूरत ज़िले कोरबा में। कोरबा जिला को 25 मई सन 1998 में प्रभावी पूर्ण राजस्व जिले का दर्जा प्राप्त हुआ| जिसका मुख्यालय कोरबा शहर में है, जो कि हसदेव और अहिरन नदी के संगम के किनारे स्थित है। कोरबा छत्तीसगढ़ की ऊर्जाधानी भी है । कोरबा जिला बिलासपुर संभाग के अंतर्गत आता है। कोरबा जिला मुख्यालय राजधानी रायपुर से लगभग 200 किलोमीटर दुरी पर स्थित है। यहां की महिलाएं भी काफी सक्रिय हैं। 

महिलाओं की सक्रियता के कारण समाजिक उत्थान भी हो रहा है। महिलाओं की सक्रियता  हुए सरकार ने भी महिलाओं को  पांवों पर खड़ा करने के लिए कई  तरह की योजनाएं बनाई हैं। इनका फायदा भी महिला वर्ग तक पहुंच  रहा है। 

छत्तीसगढ़ राज्य में कोरबा जिला उत्तर की ओर स्थित है जो, कोरिया,सरगुजा,बिलासपुर,जांजगीर,रायगढ़ जिलों से घिरा हुआ है। कोरबा जिला मुख्यालय राजधानी रायपुर से लगभग 200 किलोमीटर दुरी पर स्तिथ है। कोरबा जिले का कुल क्षेत्रफल 7,14,544 हेक्टेयर है जिसमें से 2,83,497 हेक्टेयर वन भूमि है,जो की कुल क्षेत्रफल का लगभग 40 प्रतिशत है। 

मोदी की गारंटी के तहत छत्तीसगढ़ सरकार द्वारा आज से महतारी वंदन योजना से आवेदन की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है। प्रतिमाह एक हजार रुपए और साल में 12 हजार महिलाओं के खाते में अंतरित करने के साथ उन्हें आर्थिक मदद पहुंचाने की इस पहल से महिलाओं में एक अलग ही उत्साह का वातावरण है। उनका कहना है कि सरकार की इस योजना से हमें अब अपनी छोटी-छोटी जरूरतों में किसी के पास पैसा मांगने की आवश्यकता नहीं होगी। मीडिया ने  में महिला वर्ग से भी बात की। 

कोरबा जिले के कोरबा विकासखंड अंतर्गत ग्राम दोन्दरो की श्रीमती सुषमा देवांगन ने बताया कि हमने सोचा भी नहीं था कि महिलाओं के लिए ऐसी योजनाएं शुरू की जाएगी जिसमें हर माह एक हजार रुपए  राशि दी जाएगी। उन्होंने कहा कि हम घर चलातीं हैं और अक्सर अपनी बचत के पैसे को भी घर के जरूरी सामानों के लिए खर्च कर देतीं हैं। होता यह है कि हमारी पारिवारिक जेब भी खाली हो जाती है और व्यक्तिगत। इसलिए सरकारी सहायता हमारे लिए बहुत अच्छी खबर की तरह आई है। सरकार से एक हजार रुपए मिलने से हम अपने आवश्यकताओं के लिए पैसे का इंतजाम कर पाएंगी।

इसी संबंध में ग्राम पताढ़ी की कविता यादव ने बताया कि महतारी वंदन योजना बहुत अच्छी योजना है। वह भी इसका आवेदन करेंगी। उन्होंने बताया कि मेरी जैसी अनेक महिलाओं को इस योजना से लाभ मिलेगा। यह योजना हमें आर्थिक रुप से मज़बूत बनाएगी। हम अपनी छोटी-छोटी आवश्यकताओं को पूरा कर पाएंगी। 

इस योजना को लेकर ग्राम बेन्दरकोना की श्रीमती सुलोचना बाई ने बताया कि हम इस योजना के प्रारंभ होने का इंतजार कर रहे थे। अब यह योजना शुरू हो गई है। आज से फॉर्म भराया जा रहा है। जल्द ही यह प्रक्रिया भी पूरी  हो जाएगी।

उन्होंने बताया कि हम महिलाओं के लिए एक-एक रुपये का महत्व होता है। कई बार एक-एक रुपये बचा कर कुछ पैसे बचत करतीं हैं। सरकार द्वारा एक माह में एक हजार रुपये और साल में 12 हजार रूपए दिए जाने से महिलाओं को सक्षम बनने के साथ बहुत राहत मिलेगी। 

इसे एक शानदार पहल बताते हुए ग्राम गोढ़ी की ललिता बाई भी बहुत खुश थी। वह भी महतारी वंदन योजनांतर्गत आवेदन करने शिविर में आई हुई थीं। उन्होंने बताया कि छत्तीसगढ़ सरकार द्वारा आज से आवेदन लेने की जानकारी मिली है, इसलिए वह भी ऑनलाइन आवेदन करने अपना जरूरी दस्तावेज इकट्ठा कर रहीं हैं। उन्होंने भी इस योजना से महिलाओं को लाभ मिलने और सशक्तिकरण होने की बात कही।

अब बात करते हैं नियमों और विधिविधान की। इस मकसद के लिए पात्रता की शर्तें इस प्रकार हैं:

महतारी वंदन योजना के लिए निर्धारित पात्रता शर्ताे में महिला को छत्तीसगढ़ का निवासी होना जरूरी है। इसके अलावा जिस वर्ष आवेदन किया जा रहा है उस वर्ष विवाहित महिला की आयु 01 जनवरी 2024 में 21 वर्ष से कम नही होनी चाहिए। योजना के अंतर्गत विधवा, तलाकशुदा, परित्यक्त महिला भी पात्र होंगी। 

महतारी वंदन योजना के अंतर्गत प्रत्येक पात्र महिला को 1000 रूपए की प्रतिमाह के मान से साल में 12 हजार रूपए की राशि डी.बी.टी के माध्यम से उनके बैंक खातों में हस्तांतरण किया जाएगा। विभिन्न पेंशन योजनाओं के तहत लाभान्वित होने वाली ऐसी महिलाएं जिन्हे प्रतिमाह 1000 रूपए से कम राशि मिल रही है, उन्हें योजना के लिए पात्र होने पर अतिरिक्त राशि स्वीकृत की जाएगी, जिससे उन्हें अधिकतम 1000 रूपए मासिक राशि प्राप्त हो सकेगी।

अब आनलाइन आवेदन हेतु पोर्टल एवं एप्प की भी बात कर लें:

महतारी वंदन योजना के लिए आवेदन निःशुल्क होगा। इस योजना के लिए ऑनलाइन भरने के लिए पोर्टल  https://www.mahtarivandan.cgstate.gov.in पर आवेदन करना होगा। इसके अलावा योजना के लिए बनाए गए मोबाईल एप्प पर भी आवेदन जमा किया जा सकता है। योजना के लिए आवेदन 05 फरवरी से लिए जाएंगे। आवेदन भरने की अंतिम तिथि 20 फरवरी 2024 होगी।

ये दस्तावेज़ जमा करना होगा-

आवेदन करते समय हितग्राहियों को स्वयं का सत्यापित किया हुआ पासपोर्ट साइज की फोटो, स्थानीय निवास प्रमाण पत्र, राशन कार्ड, मतदाता परिचय पत्र में से कोई भी एक, स्वयं एवं पति का आधार कार्ड, स्वयं एवं पति का पैन कार्ड (यदि हो तो), विवाह का प्रमाण पत्र, ग्राम पंचायत व स्थानीय निकायों द्वारा जारी प्रमाण पत्र, विधवा होने की स्थिति में पति का मृत्यु प्रमाण पत्र, परित्यक्ता होने की स्थिति में समाज द्वारा जारी वार्ड अथवा ग्राम पंचायत द्वारा जारी प्रमाण पत्र, जन्म प्रमाण पत्र हेतु 10 अथवा 12 की अंकसूची, स्थानांतरण प्रमाण पत्र, पैन कार्ड, परिचय पत्र, ड्राइविंग लाइसेंस में से कोई एक, बैंक खाते का विवरण एवं बैंक पासबुक की छायाप्रति तथा स्व-घोषणा अथवा शपथ पत्र जमा कराना होगा।  इस तरह यह सारी प्रक्रिया पूरी होते ही सबंधित महिला इस लाभ की पात्र बन जाएगी। 

आपको सरकार की यह पहल कैसी लगी अवश्य बताएं। आपके विचारों की इंतज़ार रहेगी ही। महिला उत्थान अर्थात पूरे समाज का उत्थान।  

Friday, 19 January 2024

छत्तीसगढ़ नारायणपुर के बूझमाड़ की रीना पोटाई की किस्मत जागी

स्वरोजगार स्थापित करने हेतु मिला 50 हजार रुपए

नारायणपुर: 19 जनवरी 2024: (के.के. सिंह-मीडिया लिंक//छत्तीसगढ़ मेल डेस्क):: 

लगन भी हो, प्रतिभा भी हो, इरादा भी हो और कौशल भी हो तो भी बहुत बार बिना धन के बात नहीं बनती। लक्ष्मी की कृपा से ही पूरे हैं सभी काम। अगर धन पास न हो तो सभी कुछ धरा धराया रह जाता है। छत्तीसगढ़ में रीना पोटाई की किस्मत धन जागी। 

किस्मत को कोसने से तो क्या  होता है। रीना भी किसी इंतज़ार में थी। आखिर कभी तो हालात करवट लेंगें! आखिर ुसकता खबर पहुंची जिला अंत्यावसायी सहकारी विकास समिति की। इस समिति द्वारा अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति एवं पिछड़ावर्ग समुदाय के शिक्षित बेरोजगारों को स्वरोजगार उपलब्ध कराने हेतु न्यूनतम ब्याज दर पर ऋण उपलब्ध कराया जाता है। इस समिति के पास इस तरह की कई योजनाएं हैं। 

इनमें वर्गवार योजनायें अनुसूचित जनजाति हेतु ट्रेक्टर ट्राली, स्मॉल बिजनेस, आदिवासी महिला सशक्तिकरण योजना, गुड्स कैरियर, टर्मलोन ऋण, स्व सहायता समूह (माइको क्रेडिट योजना), आदिवासी स्वरोजगार योजना, अनुसूचित जाति हेतु अंत्योदय स्वरोजगार योजना और पिछड़ा वर्ग हेतु टर्मलोन का ऋण शामिल हैं। इस तरह के अवसर सचमुच किस्मत बदल देते हैं। 

बस इन्हीं योजनाओं के अंतर्गत नारायणपुर में आयोजित प्रधानमंत्री जनमन योजना कार्यक्रम में अबूझमाड़ के ग्राम बेचा की रीना पोटाई को अंत्यावसायी योजना के तहत् 50 हजार रुपए की राशि चेक के माध्यम से प्रदान की गई।रीना की ज़िन्दगी में यह एक ऐतिहासिक मोड़ था। 

इस अवसर के मिलते ही रीना भी उत्साह में आ गई। रीना ने इस मौके पर बताया कि इस राशि का उपयोग वह अपने ब्यूटी पार्लर को संचालित कर अपनी आय में वृद्धि करने के लिए करेगी। पचास हज़ार रुपए का चैक पा कर उसे लगने लगा कि दुनिया मुट्ठी में की जा सकती है। 

अबुझमाड़ क्षेत्र में रीना पोटाई ब्यूटी पार्लर संचालित करने वाली पहली महिला बनने वाली थी। रीना ने अपने माता पिता को सख्त म्हणत करते थ। उसने बताया कि मेरे माता पिता कृषि कार्य करते हैं। मैं 12वीं तक पढ़ाई करने के बाद आगे की पढ़ाई करने में कामयाब नहीं हो सकी। ज़िन्दगी के झमेले और घर परिवार की ज़िम्मेदारियां इसी तरह कई बार प्रगति के रास्ते में रुकावटें बन जाती हैं। 

 इन रुकावटों को दूर करने के लिए राज्य सरकार द्वारा ज़िला अंत्यावसायी सहकारी विकास समिति के माध्यम से 50 हजार रूपये का ऋण प्रदाय किया गया है। अबुझमाड़ क्षेत्र के शिक्षित बेरोजगारों के लिए रीना पोटाई प्रेरणाश्रोत बन गई है। इसके ब्यूटी पार्लर स्वरोजगार स्थापित होने से क्षेत्र के हितग्राहियों को छत्तीसगढ़ सरकार के विभिन्न योजनाओं का लाभ लेकर अपने जीवन को नई दिशा में ले जाने के लिए एक संकेत मिला है।

इस योजना के तहत् लाभ प्रदाय करने के लिए रीना ने प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी और प्रदेश के मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय को धन्यवाद ज्ञापित की है। लेकिन अभी और भी बहुत से ज़रूरतमंद लोग बाकी हैं जो  सुअवसरों की राह देख रहे हैं। उन तक भी  मां लक्ष्मी की कृपा जल्द पहुंचनी चाहिए। 

Monday, 15 January 2024

रोजगार के लिए कुसमुंडा जीएम कार्यालय पर ग्रामीणों ने किया कब्जा

Monday 15th January 2024 at 5:10 PM *छत्तीसगढ़ किसान सभा (CGKS)* AIKS से संबद्ध)* *जिला समिति कोरबा, छत्तीसगढ़*

 किसान सभा ने कहा:जारी रहेगा आंदोलन 


कोरबा
:15 जनवरी 2024: (*संजय पराते//छत्तीसगढ़ मेल)::

लंबित  रोजगार प्रकरणों को निराकृत करने की मांग को लेकर छत्तीसगढ किसान सभा और भूविस्थापित रोजगार एकता संघ के नेतृत्व में खनन प्रभावित ग्रामीणों ने आज कुसमुंडा जीएम कार्यालय के अंदर कब्जा कर लिया तथा धरना में बैठ गए। इस आंदोलन में महिलाएं भारी संख्या में शामिल हैं। आंदोलनकारी ग्रामीणों ने दोपहर का भोजन भी पंगत में बैठकर कार्यालय के अंदर ही किया। भू-विस्थापितों का कब्जा आंदोलन शुरू हो गया है। जीएम कार्यालय के अंदर गलियारे में ही भू-विस्थापितों ने पंगत में बैठकर भोजन किया। ग्रामीणों और भूविस्थापितों के इस तरह प्रदर्शन से कोयला प्रबंधन और जिला प्रशासन में हड़कंप मच गया है। आंदोलनकारियों को समझाने का काम चल रहा है, लेकिन वे कार्यालय छोड़ने के लिए तैयार नहीं है। छत्तीसगढ़ किसान सभा के जिला सचिव प्रशांत झा ने कहा है कि अब उन्हें आश्वासन नहीं, कार्यवाही चाहिए और प्रत्येक खातेदार को रोजगार मिलने तक ग्रामीण और भूविस्थापित कार्यालय के अंदर ही बैठे रहेंगे।
 
उल्लेखनीय है कि कोयला उत्खनन के लिए इस क्षेत्र में स्थाई नौकरी देने और बुनियादी मानवीय सुविधाओं के साथ पुनर्वास देने के वादे के साथ 40-50 वर्ष पहले हजारों एकड़ भूमि का अधिग्रहण किया था, लेकिन एसईसीएल ने यह वादा पूरा नहीं किया। तब से लेकर आज तक ग्रामीण रोजगार और पुनर्वास के लिए भटक रहे हैं। कुसमुंडा कार्यालय के सामने 800 दिनों से उनका अनिश्चितकालीन धरना चल रहा है, खदान बंदी से लेकर चक्का जाम और कार्यालय बंदी तक कई जुझारू आंदोलन हुए हैं, लेकिन हर बार प्रबंधन द्वारा उन्हें आज या कल तक कार्यवाही का आश्वासन ही मिला है। 

किसान सभा नेता का कहना है कि जमीन किसानों का स्थाई रोजगार का जरिया होता है। सरकार ने जमीन लेकर किसानों की जिंदगी के एक हिस्से को छीन लिया है। इसलिए जमीन के बदले पैसा और ठेका नहीं, छोटे-बड़े सभी खातेदार को स्थाई नौकरी देना होगा। उन्होंने आरोप लगाया कि पुराने लंबित रोजगार प्रकरणों को लेकर एसईसीएल गंभीर नहीं है और इसके खिलाफ आंदोलन और तेज किया जाएगा।

भू-विस्थापित रोजगार एकता संघ के नेता दामोदर श्याम, रेशम यादव, रघु यादव, सुमेन्द्र सिंह कंवर ठकराल आदि ने कहा कि भू विस्थापितों को जमीन के बदले बिना किसी शर्त के रोजगार देना होगा और वे अपने इस अधिकार के लिए अंतिम सांस तक लड़ेंगे। 

जीएम कार्यालय में घुसने से पहले आंदोलनकारियों ने दो घंटे तक खदान बंद रखा। मोहन यादव, बृजमोहन, जय कौशिक, दीननाथ, फिरत लाल, उत्तम दास, जितेंद्र, होरीलाल, अनिल बिंझवार, हेमलाल, हरिहर पटेल, कृष्णा, फणींद्र, अनिरुद्ध, चंद्रशेखर, गणेश, सनत आदि इसका नेतृृत्व कर रहे थे।

देर शाम को इन पंक्तियों के लिखे जाने तक कोयला प्रबंधन के साथ दो दौर की वार्ता विफल हो चुकी है और आंदोलनकारी बिलासपुर से उच्चाधिकारियों को बुलाने और लिखित में समझौता करने की मांग पर अड़े हुए हैं। किसान सभा की अगुआई में जीएम कार्यालय पर ग्रामीणों का कब्जा बना हुआ है और रात के खाने की तैयारी चल रही है।

इस प्रेस विज्ञप्ति को छत्तीसगढ़ किसान सभा, कोरबा अध्यक्ष जवाहर सिंह कंवर और सचिव प्रशांत झा ने जारी किया। 

*संजय पराते छत्तीसगढ़ के सक्रिय और जुझारू कार्यकर्ता होने के साथ साथ वाम नज़रिए से पैनी नज़र रखने वाले पत्रकार भी हैं। 

Tuesday, 3 October 2023

किसान विरोधी नीतियों चलते किसान फिर केंद्र सरकार से हुए नाराज़

Monday 2nd October 2023 at 10:29 PM 

राज्य की कांग्रेस सरकार के खिलाफ भी किसानों का रोष तीखा हुआ 

*गांधी जयंती पर 10 संगठनों के सैकड़ों किसानों ने 30 किमी. की पदयात्रा की

*गांधी प्रतिमा पर न्याय के लिए संघर्ष तेज करने का लिया संकल्प भी दोहराया 


रायपुर: 2 अक्तूबर 2023: (छत्तीसगढ़ मेल डेस्क)::

महात्मा गांधी की हत्या करने वाली विचारधारा को मानने वालों ने कभी सोचा न होगा कि शहादत के 75 बरस बाद भी महात्मा गांधी जी के विचार देश के जन आंदोलनों को तेज़ करने में अहम भूमिका निभाएंगे। 

*किसान विरोधी नीतियों के खिलाफ 10 संगठनों के सैकड़ों किसानों ने 30 किमी. की पदयात्रा की, गांधी प्रतिमा पर न्याय के लिए संघर्ष तेज करने का लिया संकल्प*

केन्द्र की भाजपा सरकार की किसान व विरोधी नीतियों और राज्य की कांग्रेस सरकार की किसानों से वादाखिलाफी से आक्रोशित सैकड़ों किसानों ने आज संयुक्त किसान मोर्चा के आह्वान पर नई राजधानी से आजाद चौक तक 30 किमी. की पदयात्रा की तथा गांधी प्रतिमा पर माल्यार्पण करके न्याय के लिए किसानों के संघर्ष को तेज करने का संकल्प लिया।

उल्लेखनीय है कि पूरे देश में संयुक्त किसान मोर्चा के बैनर पर किसानों का साझा आंदोलन विकसित हो रहा है। संयुक्त किसान मोर्चा स्वामीनाथन आयोग की सिफारिशों के आधार पर सकल लागत का डेढ़ गुना समर्थन मूल्य देने का कानून बनाने, किसानों को पूरी तरह कर्जमुक्त करने की केंद्रीय मांग के साथ ही राज्य के किसानों की ज्वलंत समस्याओं पर किसानों को संगठित करके एक व्यापक आंदोलन छेड़ने जा रहा है। रायपुर में आज किसान मोर्चा की इस पदयात्रा के जरिये नई राजधानी से प्रभावित किसानों की पुनर्वास तथा रोजगार से जुड़ी मांगों को पूरा करने के साथ ही पिछली भाजपा सरकार द्वारा दो साल के रोके गए बोनस का भुगतान करने की मांग की गई है।

संयुक्त किसान मोर्चा की विज्ञप्ति के अनुसार इस पदयात्रा में छत्तीसगढ़ बचाओ आंदोलन, नई राजधानी प्रभावित किसान संघर्ष समिति, जिला किसान संघ राजनांदगांव तथा बालोद, छत्तीसगढ़ मुक्ति मोर्चा, छमुमो (मजदूर-किसान कार्यकर्ता समिति), क्रांतिकारी किसान सभा, किसान महासभा, भारतीय किसान यूनियन, मजदूर-किसान महासंघ बिलासपुर, हसदेव अरण्य बचाओ संघर्ष समिति तथा अखिल भारतीय किसान सभा से संबद्ध छत्तीसगढ़ किसान सभा आदि संगठनों के सैकड़ों किसानों ने नई राजधानी से रायपुर में आजाद चौक स्थित गांधी प्रतिमा तक पदयात्रा की। इस पदयात्रा का नेतृत्व रूपन चंद्राकर, कामता प्रसाद रात्रे, सुदेश टीकम, रमाकांत बंजारे, गेंद सिंह ठाकुर, पूर्व विधायक जनकलाल ठाकुर, कलादास डहरिया, सौरा यादव, तुहिन देव, हेमंत टंडन, नरोत्तम शर्मा, श्याम मूरत कौशिक, आलोक शुक्ला तथा संजय पराते ने आदि ने किया।

पदयात्रा से पूर्व ग्राम चीचा तथा समापन स्थल गांधी प्रतिमा पर हुई संक्षिप्त सभा में वक्ताओं ने महात्मा गांधी को श्रद्धांजलि अर्पित करते हुए कहा कि गांधीजी ने गोरे अंग्रेजों के खिलाफ लड़ाई लड़ी थी। आज लड़ाई उन काले चोरों और कॉर्पोरेटपरस्त सरकार के खिलाफ है, जो जल, जंगल, जमीन, खनिज और प्राकृतिक संसाधनों को लूटने के लिए किसानों को जमीन से बेदखल कर रही है और आदिवासियों का राज्य-प्रायोजित जनसंहार कर रही है, हसदेव के जंगलों को उजाड़ने पर तुली है तथा देश की सार्वजनिक संपदा को अडानी-अंबानी को सौंप रही है। इस लूट के खिलाफ ही गांधीजी की लड़ाई थी और गांधी के सत्याग्रह के रास्ते पर चलकर ही इस लड़ाई को आगे बढ़ाया जाएगा। उन्होंने कहा कि गांधीजी की हत्या करने वाली गोडसे की विचारधारा और आरएसएस-भाजपा की उस फूटपरस्त राजनीति को भी इस देश के किसान मात देंगे, जो यहां कृषि का कार्पोरेटीकरण करना चाहते हैं। संयुक्त किसान मोर्चा ने लखीमपुर खीरी में किसानों की हत्या के लिए जिम्मेदार मंत्री अजय टेनी को बर्खास्त करने तथा हत्यारों को सजा देने की भी मांग की।

संयुक्त किसान मोर्चा की समन्वय समिति की ओर से संजय पराते 94242-31650 द्वारा जारी

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Tuesday, 8 August 2023

अनुशासन भंग आरोप में सुखरंजन नंदी माकपा से निष्कासित

Tuesday 8th August 2023 at 7:43 PM

छत्तीसगढ़ की वाम सियासत में फिर लिया गया सख्त एक्शन 

रायपुर> 8 अगस्त 2023> छत्तीसगढ़ मेल ब्यूरो>>

मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी की छत्तीसगढ़ राज्य समिति ने पार्टी के पूर्व राज्य समिति सदस्य सुखरंजन नंदी को पार्टी से निष्कासित कर दिया है। पार्टी राज्य समिति के इस फैसले का अनुमोदन पार्टी की केंद्रीय समिति ने भी कर दिया है।

माकपा राज्य सचिव एम के नंदी ने मीडिया को दी जानकारी में बताया है कि सुखरंजन नंदी पर पार्टी के अंदर गुटबाजी करने, जन संगठनों के समानांतर गतिविधियां आयोजित करने, सोशल मीडिया में पार्टी व नेतृत्व के खिलाफ दुष्प्रचार करने और संगठन का अनुशासन भंग करने का आरोप था। इन आरोपों को राज्य समिति ने सही पाया।

माकपा से निष्कासन के पश्चात भी सुखरंजन नंदी पार्टी नेता के रूप में बयान दे रहे हैं, जिसके लिए अब वे अधिकृत नहीं है। पार्टी ने इसकी आलोचना करते हुए मीडिया को स्पष्ट किया है कि अब सुखरंजन नंदी का माकपा से कोई संबंध नहीं है।

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Saturday, 5 August 2023

छत्तीसगढ़ किसान सभा आंदोलन को तैयार

 Saturday: 5th  August 2023 at 8:48 PM

 11 को कुसमुंडा और 17 को गेवरा खदान-कार्यालय बंद का आह्वान

*कोल इंडिया के चेयरमैन को ज्ञापन सौंप भू-विस्थापितों की समस्याओं का निराकरण करने की मांग की


गेवरा (कोरबा): (छत्तीसगढ़): 5 अगस्त 2023: (कार्तिका सिंह//छत्तीसगढ़ मेल डेस्क):: 

सतर्क और जागरूक हुए किसानों का संघर्ष लगातार जारी है। दिल्ली मोर्चे पर सहमति बनने के बाद भी बहुत सी जगहों पर किसान अपनी मांगों को ले कर  निरंतर संघर्ष कर रहे हैं। अब नए संघर्षों की खबरें आई हैं छत्तीसगढ़ से। वहां किसान पूरे जोश में हैं। 

छत्तीसगढ़ किसान सभा ने आज कोल इंडिया के नए चेयरमैन पीएम प्रसाद को ज्ञापन सौंपकर भू-विस्थापितों की समस्याओं का निराकरण करने की मांग की है। किसान सभा ने 11 अगस्त को को कुसमुंडा और 17 अगस्त को गेवरा खदान-कार्यालय बंद करने के अपने आह्वान को पुनः दुहराया है।

उल्लेखनीय है कि कोरबा जिले में एसईसीएल के मेगा प्रोजेक्ट कुसमुंडा, गेवरा और दीपका में रोजगार, बसावट तथा जमीन वापसी सहित मूलभूत सुविधाओं को लेकर छत्तीसगढ़ किसान सभा और भू-विस्थापित रोजगार एकता संघ मिलकर लगातार दो वर्षों से आंदोलनरत है। कोयला उत्पादन बढ़ाने के उद्देश्य से चेयरमैन प्रसाद का इस प्रोजेक्ट में यह पहला दौरा था, जिसे एसईसीएल प्रबंधन ने सार्वजनिक नहीं किया था। लेकिन उनके दौरे की भनक लगते ही किसान सभा के नेतृत्व में गेवरा हाउस के सामने बड़ी संख्या में भू विस्थापित इकठ्ठा होकर दौरे का विरोध करने लगे। उनका कहना था कि कोयला उत्पादन बढ़ाने से पहले एसईसीएल प्रबंधन भू-विस्थापितों के समस्याओं का पहले निराकरण करें। भू-विस्थापितों बड़ी संख्या को देखते हुए सीआईएसएफ के जवानों ने गेस्ट हाउस के मुख्य द्वार को बंद कर दिया था। 

भू विस्थापितों के विरोध प्रदर्शन और कई बार खदान और कार्यालय के घेराव की जानकारी होते ही कोल इंडिया चेयरमैन पीएम प्रसाद और एसईसीएल के सीएमडी प्रेमसागर मिश्रा ने किसान सभा के प्रतिनिधिमंडल को गेवरा हाउस में चर्चा के लिए बुलाया। किसान सभा के जिला सचिव प्रशांत झा के नेतृत्व में प्रतिनिधिमंडल में दीपक साहू, रेशम यादव, दामोदर श्याम, रघु यादव, जय कौशिक, सुमेन्द्र सिंह ठकराल, होरी, शिवदयाल कंवर, बसंत चौहान आदि शामिल थे। चेयरमैन प्रसाद ने गंभीरता से भू विस्थापितों की समस्याओं को सुना और जल्द निराकरण का आश्वासन दिया।

किसान सभा ने अपने ज्ञापन में इस तथ्य को रेखांकित किया है कि जिन किसानों ने 1978-2004 के बीच अपनी जमीन देकर देश-दुनिया को रोशन करने का काम किया है और कोरबा जिले को ऊर्जाधानी के रूप में पहचान दिलाई है, आज वही परिवार रोजगार के लिए भटक रहे हैं। किसान सभा ने मांग की है कि हर खाते पर सभी प्रभावितों को रोजगार देने की प्रक्रिया जल्द पूरी की जाए तथा खदान बंद हो जाने अथवा अनुपयोगी होने पर पुराने अर्जित भूमि को मूल खातेदारों को वापस किया जाये। अपने ज्ञापन में किसान सभा ने पुनर्वास ग्रामों में बुनियादी सुविधाएं देने और भूविस्थापितों के बच्चो को निशुल्क शिक्षा और उनके परिवारों को एसईसीएल के अस्पतालों में मुफ्त इलाज की सुविधा प्रदान किये जाने की भी मांग की है।

किसान सभा के सचिव प्रशांत झा ने कहा है कि भू-विस्थापितों के सामने संघर्ष के अलावा कोई दूसरा रास्ता नहीं बचा है और वे इन मांगों पर 11 अगस्त को कुसमुंडा और 17 अगस्त को गेवरा में खदान बंद और कार्यालयों का घेराव करने के अपने आह्वान पर डटे हुए हैं।

*छत्तीसगढ़ किसान सभा (CGKS)-अ. भा. किसान सभा - AIKS से संबद्ध हैं और जिला समिति कोरबा, छत्तीसगढ़ में सक्रिय है। 

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Sunday, 10 April 2022

राम वन गमन पर्यटन परिपथ

 09 अप्रैल 2022

 कोरिया से सुकमा तक हर कदम में होंगे प्रभु राम के दर्शन 


रायपुर
:  09 अप्रैल 2022: (छत्तीसगढ़ मेल ब्यूरो)::

छत्तीसगढ़ प्रभु राम के ननिहाल के रूप में सम्पूर्ण विश्व में अपनी अलग पहचान रखता है। वनवास काल में प्रभु राम ने यहाँ लम्बा वक्त बिताया। यहां के ऋषियों के आश्रम, प्रकृति के मध्य वनवास काटा, इसलिए यहाँ की जनश्रुतियों, लोककथाओं और आम जनजीवन में राम रचे-बसे हैं।

मुख्यमंत्री श्री भूपेश बघेल ने जनमान्यताओं का सम्मान करते हुए और भगवान प्रभु राम के ननिहाल प्राचीन दक्षिण कौशल और वर्तमान छत्तीसगढ़ में राम पथ वनगमन पर्यटन परिपथ की परियोजना तैयार की। इस परियोजना में राम वनगमन मार्ग से जुड़े धार्मिक और ऐतिहासिक महत्व के स्थलों को सजाने, संवारने और इन्हें पर्यटन की दृष्टि से सुविधा सम्पन्न बनाने का काम हाथ में लिया गया है। ऐसी मान्यता है कि प्रभु श्रीराम के साथ माता सीता और लक्ष्मण ने वनवास काल 14 वर्षों में 10 साल छत्तीसगढ़ में बिताये थे। जिन जगहों पर प्रभु राम आए थे ऐसे 75 स्थानों को चिन्हांकित कर धार्मिक पर्यटन के अनुरूप विकसित करने का लक्ष्य रखा गया है।

शिवनाथ, जोंक और महानदी के त्रिवेणी संगम में स्थित शिवरीनारायण के मंदिर परिसर एवं आस-पास के क्षेत्रों को विकसित करने एवं पर्यटकों की सुविधाओं के लिए 39 करोड़ रूपए की कार्य योजना तैयार की गई है। जिसके प्रथम चरण में 6 करोड़ रूपए के कार्य का लोकार्पण 10 अप्रैल को रामनवमी के दिन मुख्यमंत्री श्री भूपेश बघेल करने जा रहे हैं। इनमें शिवरीनारायण के मंदिर परिसर का उन्नयन एवं सौदर्यीकरण, दीप स्तंभ, रामायण इंटरप्रिटेशन सेन्टर एवं पर्यटक सूचना केन्द्र, मंदिर मार्ग पर भव्य प्रवेश द्वार, नदी घाट का विकास एवं सौंदर्यीकरण, घाट में प्रभु राम-लक्ष्मण और शबरी माता की प्रतिमा का निर्माण किया गया है। इसी प्रकार पचरी घाट में व्यू पाइंट कियोस्क, लैण्ड स्केपिंग कार्य, बाउंड्रीवाल, मॉड्यूलर शॉप, विशाल पार्किंग एरिया और सार्वजनिक शौचालय का निर्माण शामिल है।

राम वन गमन पर्यटन परिपथ के अंतर्गत कोरिया से सुकमा तक के धार्मिक स्थलों को जोड़ने के लिए 2260 किमी की लंबाई तक सड़क निर्माण भी प्रस्तावित है। इस मार्ग में छायादार और फलदार पौधों का रोपण वन विभाग द्वारा किया जा रहा है। इस परियोजना के तहत चिन्हांकित 75 स्थानों में से प्रथम चरण में चिन्हांकित 9 स्थलों को विकसित करने की परियोजना तैयार की गई है। इस पर्यटन परिपथ के पूर्ण होने से देश के विभिन्न हिस्सों से न केवल पर्यटक छत्तीसगढ़ आएगें, साथ ही छत्तीसगढ़ के विभिन्न हिस्सों से पर्यटकों का यहां आना-जाना लगा रहेगा। पर्यटन को बढ़ावा मिलने से स्थानीय लोगों को रोजगार मिलेगा। वहीं रोजगार के नए अवसरों में भी वृद्धि होगी।

राम वन गमन पर्यटन परिपथ के तहत प्रथम चरण में चिन्हांकित स्थलों में सीतामढ़ी-हरचौका (कोरिया), रामगढ़ (सरगुजा), शिवरीनारायण (जांजगीर-चांपा), तुरतुरिया (बलौदाबाजार), चंदखुरी (रायपुर), राजिम (गरियाबंद), सिहावा सप्तऋषि आश्रम (धमतरी), जगदलपुर (बस्तर) और रामाराम (सुकमा) 138 करोड़ रुपए की लागत से इन क्षेत्रों में पर्यटन के विकास का कार्य होगा। इन स्थानों में पर्यटन की दृष्टि से सौंदर्यीकरण एवं अन्य साज सज्जा के कार्य किए जाएंगे।

प्रभु राम के छत्तीसगढ़ में प्रवेश कोरिया जिले के सीतामढ़ी-हरचौका से हुआ था। यहां विभिन्न पर्यटक सुविधा के विकास के लिए तीन करोड़ 84 लाख दो हजार रूपए स्वीकृत किए हैं। कोरिया जिले के सीतामढ़ी के पास घाट पर कियोस्क निर्माण कार्य के लिए 66 लाख 21 हजार रूपए, सीतामढ़ी के पास बैठने की जगह और घाट के आस-पास पैदल मार्ग के साथ गजीबो निर्माण कार्य के एक करोड़ 42 लाख सात हजार रूपए एवं घाट विकास कार्य हेतु एक करोड़ 75 लाख 74 हजार रूपए स्वीकृत किए गए हैं।

सुकमा जिले के रामाराम छत्तीसगढ़ में प्रभुराम के वनवास काल का अंतिम पड़ाव है। यहां पर्यटकों के रुकने की व्यवस्था एवं परिपथ निर्माण प्रस्तावित है। सिहावा में यात्रियों के ठहरने के लिए समरसता भवन, ऋषि आश्रम जीर्णाेद्धार का कार्य होगा। पेयजल सुविधा, गार्डन निर्माण, तालाब सौंदर्यीकरण, शौचालय, विश्रामगृह, नील नदी में स्टॉप डेम, अंडरग्राउंड नाली निर्माण का कार्य होगा। तुरतुरिया में कॉटेज बनाए जाएंगे, महानदी पर वाटरफ्रंट डेवलपमेंट और कॉटेज विकसित होंगे, बस्तर व दंतेवाड़ा के गीदम में जटायु द्वार, बारसूर में ट्राइबल कॉटेज बनाए जाने की योजना है।

Saturday, 28 August 2021

रायपुर:अल्प बारिश में सोलर पंप बने फसलों के लिए संजीवनी

 ज़िले में कुल 7025 सोलर पंप स्थापित किये जा चुके है 


रायपुर
28 अगस्त 2021: (छत्तीसगढ़ मेल ब्यूरो)::

राज्य के कई इलाकों में अल्प वर्षा के चलते खरीफ फसलों को सूखने से बचाने में सोलर पंप संजीवनी साबित हो रहे है। सरकार की सौर सुजला योजना के अंतर्गत सुदूर ग्रामीण एवं वनांचल के किसानों के लिए क्रेडा द्वारा स्थापित सोलर पंप फसलों की सिंचाई के लिए भरपूर काम आ रहे हैं। सौर सुजला योजना लघु एवं सीमांत कृषकों के लिए एक सफल योजना है। गरियाबंद जिले में सौर सुजला योजना के तहत अभी तक कुल 7025 सोलर पंप स्थापित किये जा चुके है। उल्लेखनीय है कि गरियाबंद जिले में सौर सुजला योजना के प्रथम चरण से लेकर चतुर्थ चरण तक 5860 सोलर पंपों की स्थापना की गई है। सोलर पंपों की स्थापना की दृष्टि से गरियाबंद जिला अग्रणी है। जिले में सौर सुजला योजना के पंचम चरण में 2000 पंप स्थापना के लक्ष्य के विरूद्ध अब तक 1235 पंप स्थापित किये जा चुके है। शेष पंपों की स्थापना का काम जारी है।

सौर सुजला योजना के तहत विद्युतविहीन एवं दूरस्थ ग्रामों के किसानों को कृषि कार्य हेतु 95 प्रतिशत तक अनुदान में 3.5 लाख से 4.5 लाख रूपये लागत मूल्य के सोलर पंपों को मात्र 10 हज़ार से 21 हजार रूपये में प्रदान किया जा रहा है। पहले किसानों के पास सिंचाई के साधन उपलब्ध नहीं होने पर वे पूर्ण रूप से फसलों की सिंचाई के लिये वर्षा पर निर्भर रहते थे। बारिश नहीं होने या अल्प वर्षा की स्थिति में किसानों की फसल खराब हो जाती  थी, जिससे उन्हें आर्थिक नुकसान होता था। वर्तमान में सौर सुजला योजना ने किसानों को काफी राहत दी है। इस योजना से स्थापित सोलर पंप के कारण अब किसानों को  बारिश पर निर्भर नहीं होना पडता है तथा सिचाई की सुविधा मिल जाने से अब पैदावार  भी बेहतर होने लगी है। सौर सुजला योजना के तहत लाभान्वित किसानों की आर्थिक स्थिति में लगातार सुधार आ रहा है।

विकासखण्ड मैनपुर के ग्राम पथर्री के किसान श्री श्रवण सिंह, जयराम नेताम, धनसिंग नेताम ने बताया कि सिंचाई के साधन उपलब्ध नहीं होने से बमुश्किल खरीफ फसलों की खेती कर पाते थे । आज स्थिति यह है कि खरीफ साथ-साथ अब वह रबी फसलों की भी खेती करने लगे हैं। इससे उनकी आमदनी बढ़ी है। जीवन स्तर में बदलाव आया है। इसी तरह विकासखण्ड देवभोग के ग्राम कुम्हडईकला के किसान श्री शेषमल गिरिराज एवं श्री तुलसीदास पात्रा पहले सिंचाई साधन उपलब्ध नहीं होने के कारण कृषि जमीन होते हुये भी फसल नहीं ले पा रहे थे, पर सौर सुजला ने उनकी सिंचाई समस्या खत्म कर दी है। अब वह  अपनी जमीन पर सब्जी की भरपूर खेती करने लगे हैं। सोलर पंप लगाने से उनकी आर्थिक स्थिति अच्छी हुई है।

बिलासपुर : कोरोना काल संकट में मनरेगा बना सहारा

  मनरेगा रोजगार देने में छत्तीसगढ़ देश में प्रथम स्थान पर है 


बिलासपुर
: 28 अगस्त 2021: (छत्तीसगढ़ मेल ब्यूरो)::

कोरोना महामारी के दौरान देश के अधिकांश हिस्सों में लॉकडाउन हो गया, चाहे कोरोना संक्रमण का प्रथम चरण हो या दूसरा चरण दोनों ही समय में देश भर में लॉकडाउन होने से व्यावसायिक और आर्थिक गतिविधियों पर व्यापक प्रभाव देखा गया बहुत सी औद्योेगिक ईकाईयां बंद हो गयी अथवा इनमें उत्पादन प्रभावित हुआ। देश के बड़े-बड़े शहरों से छोटे-छोटे व्यवसाय या मजदूरी करने वाले श्रमिक अपने-अपने गांवों की ओर लौटने लगे इससे छत्तीसगढ़ राज्य के प्रवासी श्रमिक भी बहुत अधिक मात्रा में प्रभावित हुए। 

मुख्यमंत्री श्री भूपेश बघेल के निर्देश पर देश के अन्य राज्यों से छत्तीसगढ़ के फंसे श्रमिकों को विशेष ट्रेनों और बसों के माध्यम से लाया गया उन्हें मनरेगा के माध्यम से रोजगार उपलब्ध कराया गया। कोरोना संकट काल की सबसे बड़ी चुनौती थी कि किस प्रकार सुरक्षात्मक उपायों का पालन करते हुए समूह में रोजगार उपलब्ध कराने वाले कार्य जारी रखे जाये. पूरे प्रदेश भर के गांव-गांव में कोरोना से बचाव की गाइडलाइन का पालन किया गया। मनरेगा को आजीविका के साथ ही परिसंपत्तियों और सार्वजनिक सुविधाओं का माध्यम बनाया गया। मनरेगा के कार्याें में छत्तीसगढ़ उत्कृष्ट प्रदर्शन जारी है. वित्तीय वर्ष 2020-21 में मनरेगा जॉब कार्डधारी परिवारों को 100 दिनों का रोजगार देने में छत्तीसगढ़ देश में प्रथम स्थान पर है। 

मुख्यमंत्री श्री भूपेश बघेल ने मनरेगा में लगातार अच्छे प्रदर्शन के लिए संबंधित विभागों के शासकीय अधिकारियों, कर्मचारियों तथा पंचायत प्रतिनिधियों को बधाई दी है. उन्होंने कहा कि कोविड 19 के चलते लॉकडाउन के बावजूद मनरेगा के अंतर्गत तत्परता से शुरू हुए कार्याें से ग्रामीणों और प्रवासी मजदूरों को अपने गांव घरों मंे बड़ी संख्या के सीधे रोजगार मिला. मनरेगा के अंतर्गत विषम परिस्थितियों के बावजूद ग्रामीण अर्थव्यवस्था को गति प्रदान करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है.

मनरेगा के अंतर्गत सामुदायिक एवं व्यक्तिमूलक संवर्धन के कार्याें के तहत् जल संरक्षण के साथ कृषि, उद्यानिकी और पशुपालन से जुड़ी अधोसंरचना को मजबूत करने के लिए विविधि परिसंपत्तियों का निर्माण किया जा रहा है। प्रदेश के सभी विकासखण्डों में निजी डबरी, कुंआ, भूमि सुधार, तालाब निर्माण, गौठान निर्माण, पशु शेड निर्माण, चारागाह निर्माण, शासकीय भूमि पर वृक्षारोपण, व्यक्तिमूलक फलदार वृक्षारोपण, आंगनबाड़ी भवन निर्माण, हितग्राहियों के लिए बकरी शेड, मुर्गी शेड, महिला समूह के माध्यम से नर्सरी में पौध निर्माण, सिंचाई के लिए नाली निर्माण, बोल्डर डेम, चेक डेम, गोवियन निर्माण तथा महिला समूह के लिए वर्क शेड निर्माण जैसे महत्वपूर्ण कार्य कराये जा रहे है।

मनरेगा कार्यस्थलों पर कोरोना से बचाव और आवश्यक सावधानियों के बारे में भी श्रमिकों को नियमित रूप से जागरूक किया जा रहा है। देशव्यापी लॉकडाउन के दौरान प्रदेश् भर के ग्रामीणों को स्थानीय स्तर पर रोजगार उपलब्ध कराने और ग्रामीण अर्थव्यवस्था की मजबूती के लिए मनरेगा के अंतर्गत प्रदेश भर में व्यापक स्तर पर काम शुरू किये गये है. इन कार्याें से प्रतिदिन 22 लाख से 25 लाख जॉब कार्ड धारियों को रोजगार उपलब्ध हो रहा है।  

Friday, 27 August 2021

कोरबा: बैंक सखी के माध्यम से घर पहुंच हो रहा पेंशन, मजदूरी का भुगतान

 श्रीमती भगवती ने किया तीन करोड़ रूपए से अधिक का लेनदेन 

बैंक सखी की फाईल फोटो 
कोरबा: 27 अगस्त 2021: (छत्तीसगढ़ मेल ब्यूरो)::

बैंक सखी की फाईल फोटो
विकासखण्ड पाली के गांव बड़ेबांका, नानबांका, मदनपुर, चैतमा एवं कुटेलामुड़ा के ग्रामीणों को पेंशन, मजदूरी के भुगतान के लिए बैंक का चक्कर नहीं लगाना पड़ता है। बैंक सखी श्रीमती भगवती धु्रव के कारण अब ग्रामीणों को बैंकिंग सेवाएं घर-पहुंच मिल रही है। इन पांच गांवों के लोगों को मनरेगा भुगतान, पेंशन भुगतान, प्रधानमंत्री आवास योजना की राशि आसानी से गांव में मिल जा रहा है। गांव के दिव्यांग और वृद्धजनों को पेंशन लेने के लिए बैंक जाने से राहत मिल गई है। बैंक सखी भगवती पांच गांवो के 255 खातों का संचालन कर हितग्राहियों को घर पहुंच राशि का भुगतान कर रही हैं। भगवती दो साल से भी कम समय में तीन करोड़ 11 लाख 49 हजार 807 रूपए का लेनदेन कर चुकी है। राशि लेनदेन के लिए बैंक सखी भगवती को कमीशन भी प्राप्त हुआ है। श्रीमती भगवती अब तक 50 हजार रूपए बैंक कमीशन के माध्यम से प्राप्त कर चुकी हैं। गांव में घर पहुंच बैंकिग सेवाओं के मिल जाने से जहां एक ओर ग्रामीण खुश हैं, वहीं दूसरी ओर बैंक कमीशन के माध्यम से होने वाली आवक ने भगवती को आत्मनिर्भर बना दिया है। भगवती अपने घरेलू और सामाजिक जिम्मेदारियों को पूरा करने के साथ अपने बैंकिंग के कार्यों को समय पर पूरा करते हुए गांव के लोगों को राहत पहुंचा रहीं हैं। बैंक सखी भगवती ग्रामीणों को वृद्धावस्था पेंशन, निराश्रित पेंशन, गोधन न्याय योजना का पैसा एवं मनरेगा मजदूरी जैसे भुगतान हितग्राहियों को उनके खातों के माध्यम से आधार आधारित पेमेंट कर रही है। भगवती यह प्रक्रिया बायो मेट्रिक डिवाइस की सहायता से संचालित कर रही है।

विकासखण्ड पाली के ग्राम पंचायत मदनपुर की रहने वाली भगवती धु्रव बीए सेकेण्ड ईयर की पढ़ाई की है। बैंक सखी बनने से पहले भगवती गृहणी थी। दो बच्चों की मां भगवती बैंकिंग कार्यों के लिए फील्ड में अपने पति के साथ  जाती हैं। भगवती का पति गांव के बाजारों में दुकान लगाते हैं। भगवती ने बताया कि गांव में रोजगार मूलक गतिविधियों में जुड़ने और आर्थिक लाभ कमाने के उद्देश्य से लक्ष्य स्वसहायता समूह में जुड़ी। समूह में जुड़कर बैंक सखी का काम शुरू किया। भगवती के बैंक सखी बन जाने से ग्रामीणों को आसानी से बैंकिंग सुविधा का लाभ मिल रहा है। ग्रामीणों को खाता खुलवाने के लिए कहीं दूर जाना नहीं पड़ता है। भगवती के माध्यम से गांव में ही खाता खुल जाता है। गांव में बैंकिंग सेवा उपलब्ध होने से लोगों के समय और धन की बचत भी हो रही है। बैंक सखी के माध्यम से सरकार के विभिन्न शासकीय योजनाओं के सफल संचालन में सहयोग मिल रहा है।

Monday, 23 August 2021

नक्सली आतंक के बावजूद बिजली की रौशनी सफलता से पहुंचाई

 उजाले के लिए तरस रहे ग्रामीणों को मिली अंधेरे से आज़ादी 


रायपुर
: 23 अगस्त 2021: (छत्तीसगढ़ मेल ब्यूरो):: 

नक्सल आतंक के चलते यहां जनजीवन आसान नहीं है। विकास कार्य और भी मुश्किल होते हैं। फिर भी इस मकसद के लिए सर्कार कोई कसर नहीं छोड़ रही है। अब यहां घर घर मूलभूत सुविधाओं को तेज़ी से पहुंचाया जा रहा है। इन्हीं में एक सुविधा है रौशनी। घर घर रौशनी। हर गली मौहल्ले में रौशनी। 

प्राकृतिक सुंदरता और मनोहारी दृश्य के बीच भोले-भाले लोग बस्तर की पहचान है। नक्सली आंतक के बीच वर्षों से विकास में पीछे बस्तर इलाके का अंदरूनी हिस्सा बुनियादी सुविधाओं के लिए मोहताज रहा। ऐसा ही छिंदगुर, कांदानार और मुण्डागढ़ गांव है, जो सदियों से अंधेरे में ही डूबा रहा। विकास का पहिया यहां तक नक्सली भय की वजह से पहुचा ही नहीं। बिजली, पानी और सड़क की मांग को लेकर यहां के लोग आवाज उठाते तो थे, लेकिन आवाज वर्षों तक दबी की दबी ही रहीं। दरभा विकासखण्ड के अंतर्गत आने वाला कांगेर घाटी राष्ट्रीय उद्यान के गोद में बसा धुरवा जनजाति बहुल्य सुंदर सा गांव कोलेंग के आसपास छिंदगुर, कांदानार और मुण्डागढ़ गांव के लोग अपने गांव में बिजली नहीं पहुच पाने से अंधेरे में ही डूबे रहे। जिससे लोगों का जीवन अत्यंत संघर्षमय होता चला गया। कई बार मूलभूत सुविधाओं की मांग करने वाले क्षेत्र के जनप्रतिनिधियों को भी नक्सलियों  ने अपना शिकार बनाया। दहशत और खौफ के साये में जी रहे इन गांवों में विकास का सूरज तब निकला जब शासन-प्रशासन द्वारा कोलंेग में सुरक्षा बलों के कैम्प की स्थापना की गई। कैम्प स्थापना के साथ ही तेजी से हुए विकास कार्यों की बदौलत जब गांव में स्वतंत्रता दिवस के 75 वें वर्षगांठ की पूर्व संध्या में बिजली आई तो गांववालों के लिए मानों अंधेरे से आजादी मिलने के साथ एक नया सबेरा था।

दरभा विकासखण्ड के अंतर्गत आने वाले छिंदगुर, कांदानार और मुण्डागढ़ गांव के लोगों में अब बिजली पहुच जाने की खुशी है। गांव के दशमू, सुबलू, लैखन एवं छेनूराम सहित सभी ग्रामीण खुश होकर कहते हैं कि अब हम भी रात में उजाले में रहकर अपने बच्चों को अच्छे से पढ़ा-लिखा सकते हैं। ग्रामीण दशमू ने कहा कि गांव में बिजली नहीं होने से शाम होते ही अंधेरा हो जाता है। गांव के बच्चे अंधेरा होने के बाद सो जाते हैं। अब बिजली आने से गांव के बच्चे देर रात्रि तक पढ़ाई कर सकते हैं और टीवी सहित अन्य संचार साधनों से भी जुड़कर ज्ञान हासिल कर सकते हैं। उन्होंने बताया कि वह पहले बिजली के महत्व को नहीं समझते थे। उसका गांव दुर्गम इलाके में बसा है, ऐसे में उन्होंनेे कभी सोचा भी नहीं था कि वन क्षेत्र के बीच इस गांव में बिजली की सुविधा मिल पायेगी। यहां बिजली पहुचाकर सरकार ने ग्रामीणों को एक बहुत बड़ा तोहफा दिया है। दशमू ने कहा कि वह अपने बच्चे को पढ़ाई के लिए प्रेरित करेंगे और बिजली के महत्व को भी बतायेंगे।  

ग्राम छिन्दगुर, कांदानार एवं मुण्डागढ जिसमें कुल 24 मजरा टोला है। जिला मुख्यालय से लगभग 48 किलोमीटर दूर है। यहां राजीव गांधी ग्रामीण विद्युतीकरण योजना के अंतर्गत विद्युत लाइन विस्तार का कार्य लगभग तीन करोड़ रुपए की लागत से पूर्ण किया गया है। जिसमें 48 किलोमीटर 11 किलोवाट की लाइन बिछाने के साथ ही 19 नग 25 केवीए ट्रांसफार्मर स्थापित किए गए हैं। 42 किलोमीटर निम्न दाब लाइन बिछाने के साथ ही 571 घरों में निःशुल्क विद्युत कनेक्शन भी प्रदाय किया गया है। 100 बीपीएल परिवार वाले छिन्दगुर के उपरपारा, थानागुडी पारा, बुलकापार एवं सल्फीपदर पारा को प्रथम चरण में रौशन किया गया है। शेष 20 मजरा टोलों को इस माह के अंत तक अर्थात 31 अगस्त तक रौशन कर दिया जाएगा। विकास का पहिया यहां तक नक्सली भय की वजह से पहुच ही नहीं रहा था 

Thursday, 26 March 2020

नक्सली घटना में शहीद जवानों को सदन में दी गई विनम्र श्रद्धांजलि

जवानों ने बहादुरी के साथ नक्सलियों से मोर्चा लिया
रायपुर: 26 मार्च 2020: (छत्तीसगढ़ मेल ब्यूरो)::
छत्तीसगढ़ विधानसभा में आज सुकमा जिले के चिंतागुफा थाने के मिनपा एवं कसलपाड़ क्षेत्र में नक्सली हमले में शहीद जवानों को विनम्र श्रद्धांजलि दी गई। विधानसभा अध्यक्ष डाॅ. चरणदास महंत ने विधानसभा की कार्यवाही शुरू होते ही इस नक्सली घटना की सदन को जानकारी दी। उन्होंने शहीद जवानों को श्रद्धांजलि देते हुए कहा कि इस नक्सली घटना की जितनी निंदा की जाए कम है। उन्होंने कहा कि जवानों ने बहादुरी के साथ नक्सलियों से मोर्चा लिया। उनका बलिदान व्यर्थ नहीं जाएगा। मुख्यमंत्री श्री भूपेश बघेल ने इस घटना को दुर्भाग्यजनक बताते हुए कहा कि हमारे जवान नक्सलियों के साथ बहादुरी के साथ लड़े। उन्होंने अनेक नक्सलियों को भी मारा। मैं उनकी बहादुरी को नमन करता हूं। श्री बघेल ने शहीदों को परिवारजनों के प्रति संवेदना प्रकट की। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार विकास, विश्वास और सुरक्षा के साथ इस चुनौती का सामना कर रही है। जवानों की शहादत व्यर्थ नहीं जाएगी। श्री बघेल ने इस घटना में घायल जवानों के शीघ्र स्वास्थ्य लाभ की कामना की। मुख्यमंत्री ने कहा कोरोना महामारी से बचाव के लिए सोशल डिसटेंसिंग में ही सबकी सुरक्षा है। इस बीमारी से बचाव के लिए राज्य सरकार हर संभव उपाय कर रही है। नेता प्रतिपक्ष श्री धरमलाल कौशिक, उद्योग मंत्री श्री कवासी लखमा और विधायक श्री मोहन मरकाम ने भी अपने विचार व्यक्त किए। सदन में मौन रख कर विनम्र श्रद्धांजलि दी गई।

Friday, 13 March 2020

रायपुर:मशरूम से वनांचल की महिलाएं बनी आत्मनिर्भर

आमदनी के साथ साथ मिल रहा खनिजों से भरपूर पोषण आहार भी 
रायपुर: 13 मार्च 2020: (छत्तीसगढ़ मेल):: 
दुनिया लाख नश्वर सही लेकिन पैसे के बिना कहां चलती है? बहुत ही सादगी से दाल रोटी भी कहानी हो तो भी पैसा चाहिए। पैसे बिना तो प्यार व्यार भी फ़िज़ूल कहा गया है। पुरानी कहावत है-बाप भइआ,  सब से बड़ा रुपइया। इन सभी हकीकतों के बावजूद सबसे यही होता है कि पैसा आये कहाँ से? हमारे समाज में सबसे अधिक दमन का शिकार हैं महिलाये क्यूंकि सबसे अधिक मेहनत करके भी उनके पल्ले पैसा नहीं पड़ता। ऐसे में कुछ मेहनती महिलाओं ने अपने समूह बनाये और अपनी मेहनत से पैसा कमा कर दिखाया। हम यहां आपको कहानी बता रहे है उन महिलाएं की जिन्होंने मशरूम के ज़रिये अपने पैरों पर खड़ा हो कर दिखाया। 
मशरूम स्वाद का खजाना होने के साथ ही पौष्टिकता से भरपूर होता है। कम लागत में इससे अधिक आमदनी ली जा सकती है। इसे देखते हुए दूरस्थ वनांचल क्षेत्रों में प्रशासन द्वारा मशरूम उत्पादन को बढ़ावा दिया जा रहा है। इससे लोगों को स्थानीय स्तर पर पौष्टिक आहार के साथ आर्थिक आत्मनिर्भरता मिल रही है। इस दिशा में अपने कदम बढ़ाते हुए सुकमा जिले के कांजीपानी और चिपुरपाल की महिला स्व-सहायता समूहों ने स्वादिष्ट मशरूम का उत्पादन कर अपनी एक अलग पहचान कायम की है। इससे महिला समूह न केवल आर्थिक लाभ हो रहा है बल्कि लोगों को प्रोटीन, विटामिन, आवश्यक लवण और विभिन्न प्रकार के खनिजों से भरपूर पोषण आहार भी मिल रहा है। इन समूहों द्वारा 2 से 3 किलो मशरूम प्रतिदिन बेचकर अतिरिक्त आय प्राप्त की जा रही है।
   मशरूम में आवश्यक सभी पोषक तत्व होने के कारण यह कुपोषण दूर करने का चमत्कारी गुण रखता हैं साथ ही इसमें कई औषधीय गुण भी पाए जाते हैं। इन लाभों को देखते हुए कृषि विभाग द्वारा एग्रीकल्चर एक्सटेंशन रिफार्म (आत्मा) योजना के अन्तर्गत महिला समूहों को प्रशिक्षित कर मशरूम उत्पादन के लिए प्रेरित किया जा रहा है। यहां प्रशिक्षण लेकर छिन्दगढ़ विकासखण्ड के कांजीपानी गांव के कमलफूल कृषक समूह एवं चिपुरपाल गांव के ऋतम्भरा महिला कृषक समूह के द्वारा मशरूम उत्पादन किया जा रहा है। 
इस सफलता के संबंध में 10 सदस्यों वाली कमलफूल समूह की अध्यक्ष श्रीमती सुशीला बघेल व सचिव श्री फुलमती मांझी है। जबकि 11 सदस्यों वाली ऋतम्भरा महिला कृषक समूह कीे अध्यक्ष श्रीमती सुक्को बघेल व सचिव श्रीमती प्रमिला नाग है। कृषि महाविद्यालय जगदलपुर व रायपुर से मशरूम उत्पादन के ढांचे की भली-भांति जानकारी होने के बाद इन समहों ने मशरूम उत्पादन प्रारम्भ किया। 
जिला प्रशासन ने भी इन समूहों की मदद करते हुए पैरा काटने के लिए कटर मशीन उपलब्ध कराया। मशरूम उत्पादन से अपनी मेहनत को साकार रूप लेते देख ग्रामीण महिलाएं खुश हैं। महिला समूह ने बताया कि मशरूम का उपयोग सब्जी के रूप में करने के अतिरिक्त इससे बड़ी, पापड़, आचार और मशरूम पाउडर के रूप में उपयोग किया जा सकता है। इसके उपयोग से विभिन्न प्रकार के व्यंजन भी तैयार किये जा सकते हैं जो स्वादिष्ट, पौष्टिक होने के साथ कुपोषण दूर करने में सहायक होते हैं।

Sunday, 21 July 2019

मुख्यमंत्री से केंद्रीय राज्य मंत्री रेणुका सिंह की सौजन्य मुलाकात

भेंट के दौरान जनजातीय मामलों पर भी विचार हुआ
रायपुर: 21 जुलाई 2019: (छत्तीसगढ़ मेल)::
छत्तीसगढ़ में जनजातीय मामलों को आम तौर पर विशेष ध्यान दिया जाता है। इस मकसद के लिए केंद्रीय मंत्री और अन्य महत्वपूर्ण व्यक्ति भी विभिन्न स्थानों के दौरे करते रहते हैं। आज यहां इस सिलसिले में केन्द्रीय जनजातीय मामलों की राज्य मंत्री श्रीमती रेणुका सिंह ने भी विशेष दौरा किया। इस दौरे के दौरान उन्होंने मुख्यमंत्री से सौजन्य मुलाकात भी की। इस भेंट के दौरान जनजातीय मामलों पर भी विचार हुआ। 

Monday, 9 December 2013

जीत का जोश पर साथ ही काम का पूरा होश

 छत्तीसगढ़: प्राचार्यो की बैठक आगामी 13 और 16 दिसंबर को
बैकुण्ठपुर, 09 दिसम्बर 2013: (छत्तीसगढ़ मेल): काम के प्रति गंभीर रहने वाले डा रमन  सिंह जीत के इस अवसर पर भी पूरी तरह गंभीर बने हुए हैं। जीत के परिणाम आने पर भी छतीसगढ़ में डा रमन सिंह सरकार पूर्व निर्धारित कार्यक्रमों को नहीं भूली। शिक्षा और अन्य महत्वपूर्व क्षेत्रों की सरगर्मियां और तेज़ कर दी गयी हैं। जिले के बैकुण्ठपुर, सोनहत व खड़गवां विकासखण्ड के सभी शासकीय हाई स्कूल व हायर सेकेण्डरी स्कूलों के प्राचार्यो की बैठक आगामी 13 दिसंबर को आयोजित की गयी है। यह बैठक बैकुण्ठपुर के शासकीय रामानुज उच्चतर माध्यमिक  स्कूलों में पूर्वान्ह 11 बजे से आयोजित की जाएगी। इसी तरह आगामी 16 दिसंबर को मनेन्द्रगढ़ व भरतपुर विकासखण्ड के प्राचार्यो की बैठक शासकीय कन्या उच्चतर माध्यमिक विद्दालय मनेन्द्रगढ़ में आयोजित की जाएगी। जिला शिक्षा अधिकारी कोरिया श्री आर.एस.चौहान ने सभी प्राचार्यो से गत वर्ष की उपलब्धियों व आगामी वर्ष की कार्ययोजना के साथ बैठक में अनिवार्य रूप से उपस्थित होने के निर्देष दिए है। इन बैठकों में शिक्षा को और बेहतर बनाने की विचार होगी और साथ ही पिछली कारगुज़ारी की समीक्षा भी की जायेगी। यह सिलसिला उन लोगों के लिए एक सबक है जो जीत के नशे में अपनी ज़िम्मेदारियों को भूल जाते हैं।

इस बार भी 12 दिसंबर को शपथ लेंगें डाकटर रमन सिंह


भाजपा:नए निशाने नया जोश
रायपुर, 09 दिसंबर 2013: (छतीसगढ़ मेल): छतीसगढ़ विधान सभा चुनावों में लगातार तीसरी बार जीत का सेहरा लेने वाले मुख्यमंत्री डाकटर रमन सिंह ने दल बल सहित शपथ ग्रहण समारोह कि तैयारियां शुरू कर दी हैं। राजकीय सूत्रों के मुताबिक इस बार भाजपा विधायक दल के नव-निर्वाचित नेता डॉ. रमन सिंह का शपथ ग्रहण समारोह गुरूवार 12 दिसम्बर को सवेरे लगभग ग्यारह बजे राजधानी रायपुर के पुलिस परेड मैदान में आयोजित किया जाएगा। 
गौरतलब है कि डॉ. सिंह को आज प्रदेश भारतीय जनता पार्टी के विधायक दल का सर्वसम्मति से नेता चुन लिया गया। डॉ. रमन सिंह तीसरी बार आम जनता के बीच प्रदेश के मुख्यमंत्री के रूप में शपथ लेंगे। उल्लेखनीय है उनका पहला शपथ ग्रहण समारोह 07 दिसम्बर 2003 को और दूसरा शपथ ग्रहण समारोह 12 दिसम्बर 2008 को आयोजित किया गया था। यह भी एक अच्छा संयोग है कि इस बार भी डॉ. रमन सिंह बारह दिसम्बर को ही प्रदेश के मुख्यमंत्री पद की शपथ लेने जा रहे हैं।

सम्मान से मनाया जायेगा महान योद्धा वीर नारायण सिंह का शहादत दिवस

10 दिसम्बर के ही दिन भरे चौक में दिया गया था सरेआम मृत्यु दण्ड 
रायपुर: 09 दिसंबर 2013: (छत्तीसगढ़ मेल)::
जीत  भी लगातार तीसरी बार-----इस तरह की जीत के जश्न में लोग अक्सर बहुत कुछ भूल जाते हैं लेकन छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री डॉ. रमन सिंह देश की अज़ादी के लिए शहीद होने वाले वीर नारायण सिंह  भूले। उन्होंने ने कल दस दिसम्बर को छत्तीसगढ़ के महान क्रांतिकारी, स्वतंत्रता संग्राम सेनानी अमर शहीद वीरनारायण सिंह के बलिदान दिवस पर उन्हें विनम्र श्रद्धांजलि अर्पित की है। मुख्यमंत्री ने उनके शहादत दिवस की पूर्व संध्या पर आज यहां जनता के नाम जारी संदेश में कहा है कि सोनाखान के महान योद्धा वीर नारायण सिंह भारत माता और छत्तीसगढ़ महतारी के अनमोल रत्नों में से थे, जिन्होंने सन 1856 के भयानक अकाल के समय गांव, गरीब और किसानों के दर्द को महसूस कर सोनाखान क्षेत्र की पीड़ित जनता की मदद के लिए एक सम्पन्न व्यापारी 
स्केच देशबंधू से साभार
के अनाज भण्डार को खुलवाकर गरीबों में अनाज का वितरण करवाया था। अपनी माटी के मान-मर्यादा की रक्षा तथा वहां रहने वाले लोगों की खुशहाली के लिए छत्तीसगढ़ के शहीद वीर नारायण सिंह का योगदान अविस्मरणीय है। ऐसे वीर सपूत के त्याग, संघर्ष व बलिदान को आत्मसात करते हुए शासन सभी वर्गो के उत्थान सहित चहुंमुखी विकास के लिए निरंतर कार्य कर रही है। वीर नारायण सिंह ने छत्तीसगढ़ में प्रथम भारतीय स्वतंत्रता संग्राम का शंखनाद किया और देश की आजादी के लिए अपने प्राण न्यौछावर कर दिए। डॉ. सिंह ने कहा कि स्वतंत्रता संग्राम के इतिहास में वीरनारायण सिंह का नाम सुनहरे अक्षरों में लिखा गया है, जो देश और दुनिया को युगों-युगों तक सामाजिक न्याय, समानता और स्वतंत्रता के महत्व की याद दिलाता रहेगा। ज्ञातव्य है कि अमर शहीद वीर नारायण सिंह को अंग्रेज हुकुमत ने दस दिसम्बर 1857 को राजधानी रायपुर के वर्तमान जयस्तंभ चौक पर सार्वजनिक रूप से मृत्यु दण्ड दिया था। वीर नारायण सिंह देश की आजादी के लिए शहीद हुए। 

Saturday, 9 November 2013

छत्तीसगढ़ - तथ्यों पर एक नजर

08-नवंबर-2013 19:41 IST
(विधानसभा चुनाव का पहला चरण - 11 नवंबर, 2013)

क्र. सं.
मद

छत्तीसगढ़ (विधानसभ सीट कीसंख्य जहां 
मतदान होना है)-– 18
1.
कुल निर्वाचक
:
पुरुष –         14,53,730     
महिलाए –      14,78,659 
सेव -                 811
एनआरआई मतदात:     --     
------------------------------
योग -       29,33,200
2.
उम्मीदवारों की कुल संख्य
:
143

3
महिल उम्मीदवारों की कुलसंख्य

10

4.
उम्मीदवारों की अधिकतमसंख्य वाल विधानसभा कीसंख्य और नाम
:
75 राजनंदगांव 14 उम्मीदवार
86- जगदलपुर- 14 उम्मीदवार

5.
उम्मीदवारों की न्यूनतम संख्यवाल विधानसभा की संख्यऔर नाम

90 कोंट
उम्मीदवारों की संख्य -4
6.
 दल वार उम्मीदवारों की सूच:
:
भारतीय जनत पार्ट - 18
बहुजन समाज पार्ट - 18
भारतीय कम्युनिस्ट पार्ट - 08
मार्क्सवाद कम्युनिस्ट पार्टी -01
भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस - 18
एनसीप - 02
राज्य स्तरीय दल - शून्य
अन्य + निर्दलीय - 78

7.
सबस बड़ विधान सभ क्षेत्र -क्षेत्रवार 
:
बीजापुर
8.
सबस बड़ विधान सभ क्षेत्र -निर्वाचक वार 

73- खैरागढ़
9.
सबस छोट विधान सभ क्षेत्र -निर्वाचक वार 

85- बस्तर
10.
विधानसभा की संख्य और नामजहां सीध मुकाबला है
:
-----
11.
मतदान केंद्रों की संख्य 

:
4,074
12.
चुनाव में इस्तेमाल की जानवाल इलेक्ट्रानिक मशीनों कीसंख्य

4142
  वि. कासोटिया/पीके - 6910